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नवरात्रि के दौरान कलश की स्थापना (कलश पूजन) एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। इसे इस प्रकार किया जाता है:



1. स्थान का चयन:

घर के एक पवित्र और साफ स्थान का चयन करें, जैसे पूजा घर या मुख्य द्वार का क्षेत्र।



2. सफाई:

चुने हुए स्थान को अच्छी तरह से साफ करें और पवित्रता बनाए रखें।



3. पंडित का आमंत्रण (यदि आवश्यक हो):

यदि आप पंडित को आमंत्रित कर रहे हैं, तो उन्हें पहले से बुला लें।



4. कलश की तैयारी:

एक नई और साफ मिट्टी या स्टील का कलश लें।

कलश के अंदर थोड़ी मात्रा में चावल भरें।

कलश के अंदर एक सुपारी (पान के पत्ते) और कुछ सिक्के डालें।



5. कलश में जल भरना:

कलश को ताजे जल से भरें।

पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिलाना भी शुभ माना जाता है।



6. कलश की सजावट:

कलश के मुंह पर ताजे पत्ते (पान के पत्ते या आम के पत्ते) लगाएं।

उसके ऊपर एक लाल या पीले रंग का कपड़ा बांधें।

कपड़े को गांठ से बांधें और कलश के शीर्ष पर रखे।



7. कलश की स्थापना:

कलश को सजाए गए स्थान पर रखें।

कलश के चारों ओर हल्दी, कुमकुम और फूल चढ़ाएं।



8. पूजा विधि:

कलश के सामने दीपक जलाएं।

गंगाजल छिड़कें और कलश की पूजा करें।

मंत्रोच्चार के साथ पूजा करें, जैसे "ॐ Varunaaya Namah" या "ॐ Ganapataye Namah"।

पुष्प, चढ़ावा, और नैवेद्य अर्पित करें।



9. पूजा के अंत में:

पूजा समाप्त होने के बाद घर के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।

भक्तिपूर्वक हवन या अग्निहोत्र भी कर सकते हैं।




इस विधि को सही तरीके से पालन करने से न केवल नवरात्रि का आयोजन शुभ होता है, बल्कि धार्मिक उत्साह और सौभाग्य भी बढ़ता है।


नवरात्रि के दौरान सबसे अधिक जपे जाने वाला मंत्र है:

नव दुर्गा के मंत्र जाप में कई शक्तिशाली मंत्र शामिल हैं जो दुर्गा माता की विभिन्न रूपों को समर्पित हैं। यहाँ कुछ प्रमुख मंत्र हैं:

1. **दुर्गा सप्तशती का मंत्र:**
   - "ॐ जपाकृष्णा डाण्ड्यायै नमः"

2. **नव दुर्गा का एक प्रमुख मंत्र:**
   - "ॐ देवी दुर्गायै नमः"

3. **चंद्रघंटा देवी के लिए:**
   - "ॐ चंद्रघंटायै नमः"

4. **कुष्मांडा देवी के लिए:**
   - "ॐ कुष्मांडा देवी नमः"

5. **स्कंदमाता के लिए:**
   - "ॐ स्कंदमातायै नमः"

ये मंत्र नवरात्रि या दुर्गा पूजा के समय विशेष रूप से जाप किए जाते हैं। इनका जाप ध्यान और भक्ति से करना चाहिए।

नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से शक्तिशाली और सिद्ध मंत्रों का जाप करने से देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। यहाँ कुछ प्रमुख मंत्र हैं जो नवरात्रि में जपने के लिए सिद्ध माने जाते हैं:

1. **दुर्गा सप्तशती का मंत्र:**
   - "ॐ ऐं ह्लीं श्रीं दुर्गायै नमः"

2. **नवरात्रि के मुख्य मंत्र:**
   - "ॐ देवी दुर्गायै नमः"

3. **धनुष्पाणि देवी के लिए:**
   - "ॐ ह्लीं क्लीं सौः"

4. **सिद्धिदात्री देवी के लिए:**
   - "ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः"

5. **चंद्रघंटा देवी के लिए:**
   - "ॐ चंद्रघंटायै नमः"

इन मंत्रों का जाप नियमित रूप से और श्रद्धा पूर्वक करें, ताकि देवी की कृपा आप पर बनी रहे। ध्यान रहे कि मंत्र जाप के साथ पवित्रता, सही समय और सही जगह का ध्यान रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नवरात्रि के दौरान सबसे अधिक जपे जाने वाला मंत्र है:

**"ॐ दुर्गायै नमः"**

यह मंत्र देवी दुर्गा की पूजा और साधना के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इसे रोजाना 108 बार जपने से विशेष लाभ होता है और यह भक्त को शक्ति, सुरक्षा, और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि में हवन करने की विधि और हवन सामग्री का पालन धार्मिक मान्यता और परंपराओं के अनुसार किया जाता है। यहाँ पर एक सामान्य विधि और सामग्री की सूची दी गई है:

शारदीय नवरात्रि में हवन करने की विधि और हवन सामग्री का पालन धार्मिक मान्यता और परंपराओं के अनुसार किया जाता है। यहाँ पर एक सामान्य विधि और सामग्री की सूची दी गई है:

### हवन करने की विधि:

1. **सिद्धि और तैयारी:**
   - सबसे पहले एक स्वच्छ स्थान पर हवन कुंड (हवन अग्नि के लिए विशेष पात्र) तैयार करें।
   - हवन करने से पहले पवित्र स्नान करें और सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें।

2. **हवन सामग्री की तैयारी:**
   - हवन सामग्री (गंध, पुष्प, धूप, और अन्य सामग्रियों) को एक जगह एकत्र करें।
   - एक छोटी थाली में घी, अक्षत (साबुत चावल), फूल, और हवन सामग्री रखें।

3. **हवन प्रारंभ:**
   - हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करें। इसके लिए लकड़ी के छोटे टुकड़े या हवन सामग्रियों का उपयोग करें।
   - हवन करने वाले को पहले देवताओं की पूजा करनी चाहिए और व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए।

4. **हवन सामग्री अर्पण:**
   - हवन कुंड में एक-एक कर सामग्री अर्पित करें, जैसे घी, तिल, चावल, सूखे मेवे, आदि।
   - प्रत्येक सामग्री अर्पित करने के साथ, संबंधित मंत्रों का जाप करें।

5. **अंतिम पूजा और आरती:**
   - हवन समाप्त होने के बाद, हवन कुंड के सामने पूजा करें और आरती करें।
   - भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करें और समापन पर प्रसाद वितरण करें।

### हवन सामग्री:

1. **घी:** हवन में अग्नि को बल देने के लिए।
2. **तिल (सासम के बीज):** पवित्रता और समृद्धि के लिए।
3. **चावल (अक्षत):** शुभता और ऐश्वर्य के लिए।
4. **गंध:** सुगंधित वातावरण के लिए।
5. **फूल:** देवताओं को समर्पित करने के लिए।
6. **पानी:** पवित्रता के लिए।
7. **सुपारी और लौंग:** सुख-समृद्धि के लिए।
8. **हवन बाष्प (फूलों का अर्क):** विशेष अनुष्ठान के लिए।

इन विधियों और सामग्रियों का पालन करके आप शारदीय नवरात्रि के अवसर पर हवन कर सकते हैं। यदि आप किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान की योजना बना रहे हैं, तो स्थानीय पूजा पद्धतियों और विद्वानों से सलाह लेना भी लाभकारी हो सकता है।


नवरात्रि के दौरान हवन करने की विधि और किस देवता की आहुति डालनी है, यह आपकी व्यक्तिगत श्रद्धा और पूजा की परंपरा पर निर्भर करता है। सामान्यतः नवरात्रि के दौरान हवन विशेष रूप से माता दुर्गा की पूजा के लिए किया जाता है। यहाँ एक सामान्य विधि और आहुति देने के नियम दिए जा रहे हैं:

नवरात्रि के दौरान हवन करने की विधि और किस देवता की आहुति डालनी है, यह आपकी व्यक्तिगत श्रद्धा और पूजा की परंपरा पर निर्भर करता है। सामान्यतः नवरात्रि के दौरान हवन विशेष रूप से माता दुर्गा की पूजा के लिए किया जाता है। यहाँ एक सामान्य विधि और आहुति देने के नियम दिए जा रहे हैं:

### हवन करने की विधि:

1. **सिद्धि और तैयारी:**
   - हवन स्थल को साफ करें और हवन कुंड स्थापित करें।
   - हवन के लिए आवश्यक सामग्री को एकत्र करें।

2. **हवन प्रारंभ:**
   - हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करें।
   - एक बार अग्नि प्रज्वलित होने के बाद, पूजन सामग्री का उपयोग करें।

3. **मंत्रों और आहुति का जाप:**
   - हवन के दौरान मंत्रों का जाप करें और आहुति अर्पित करें।
   - हर सामग्री डालते समय एक विशेष मंत्र का जाप किया जाता है।

### किस-किस देवता की आहुति डालनी है:

**1. माँ दुर्गा:**
   - नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से माँ दुर्गा की पूजा की जाती है। हवन में सबसे अधिक आहुति माँ दुर्गा को अर्पित की जाती है।
   - **मंत्र:** "ॐ दुर्गायै नमः"

**2. भगवान गणेश:**
   - पहले दिन या पहले पूजा में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। हवन में गणेश को भी आहुति अर्पित की जाती है।
   - **मंत्र:** "ॐ गणेशाय नमः"

**3. देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु:**
   - नवरात्रि के विशेष दिनों पर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है।
   - **लक्ष्मी के लिए मंत्र:** "ॐ लक्ष्म्यै नमः"
   - **विष्णु के लिए मंत्र:** "ॐ विष्णवे नमः"

**4. भगवान शिव:**
   - नवरात्रि के खास अवसर पर भगवान शिव की भी पूजा की जाती है।
   - **मंत्र:** "ॐ शिवाय नमः"

**5. अन्य देवता:**
   - कुछ लोग विशेष दिन या पूजा के अनुसार अन्य देवताओं को भी आहुति अर्पित करते हैं।

### सामान्य आहुति देने की विधि:

1. **अहुति डालते समय:** हवन कुंड में तिल, घी, चावल, या अन्य सामग्री डालते समय संबंधित देवता के मंत्र का जाप करें।
2. **अशुद्धता से बचें:** हवन करते समय पूरी श्रद्धा और शुद्धता का ध्यान रखें।
3. **प्रसाद वितरण:** हवन के बाद हवन से प्राप्त प्रसाद का वितरण करें और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करें।

यह विधि और आहुति देने का तरीका सामान्य निर्देश हैं। यदि आप किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान की योजना बना रहे हैं, तो स्थानीय पूजा पद्धतियों और विद्वानों से सलाह लेना भी लाभकारी हो सकता है।

गुप्त नवरात्रि में हवन और संकल्प लेने की विधि और मंत्र जाप कैसे बनाए हवन कुण्ड गुप्त नवरात्रि में हवन करना विशेष महत्व रखता है। यहाँ हवन करने की एक सामान्य विधि दी जा रही है:


### हवन की तैयारी:

यूट्यूब चैनल : sunnynath & guru gorakhnath 
मोबाइल : 9891595270

1. **सामग्री**: हवन कुंड, आम की लकड़ी, कपूर, घी, हवन सामग्री (समिधा, गुड़, चावल, तिल, जौ, घी मिश्रित सामग्री), चंदन, पुष्प, कुमकुम, रोली, आचमन के लिए जल, पूजा की थाली, और नवग्रह समिधा।

2. **स्थान**: हवन करने के लिए शुद्ध और स्वच्छ स्थान का चयन करें। हवन कुंड को एक चौकी पर स्थापित करें और उसके चारों ओर स्वास्तिक चिन्ह बनाएं।

3. **दीप प्रज्वलन**: हवन से पहले दीपक प्रज्वलित करें और गणपति, नवग्रह, और इष्ट देवी-देवताओं का ध्यान करें।

### हवन की विधि:

1. **संकल्प**:
   - दाहिने हाथ में जल, पुष्प, और अक्षत (चावल) लेकर संकल्प करें। संकल्प में हवन का उद्देश्य और अपनी मनोकामना को ध्यान में रखें।

2. **आचमन**:
   - हाथ में जल लेकर आचमन करें और "ॐ केशवाय नमः", "ॐ नारायणाय नमः", "ॐ वासुदेवाय नमः" मंत्रों का उच्चारण करें।

3. **गणपति पूजा**:
   - "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र के साथ गणपति का पूजन करें।

4. **अग्नि प्रज्वलन**:
   - हवन कुंड में आम की लकड़ी और कपूर रखकर अग्नि प्रज्वलित करें। "ॐ अग्नये नमः" मंत्र का जाप करें।

5. **हवन सामग्री अर्पण**:
   - हवन सामग्री को एक-एक करके अग्नि में अर्पण करें। प्रत्येक आहुति के साथ "स्वाहा" बोलें। विशेष मंत्रों का जाप करते हुए आहुति दें। उदाहरण के लिए:
     - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा"
     - "ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा"
   - हवन सामग्री को त्रिपुटी में अर्पित करें (हाथ में सामग्री लेकर "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं" बोलें, फिर अग्नि में अर्पण करें और "स्वाहा" कहें)।

6. **नवग्रह आहुति**:
   - नवग्रहों की शांति के लिए विशेष आहुति दें:
     - सूर्य: "ॐ सूर्याय नमः स्वाहा"
     - चंद्र: "ॐ सोमाय नमः स्वाहा"
     - मंगल: "ॐ भौमाय नमः स्वाहा"
     - बुध: "ॐ बुधाय नमः स्वाहा"
     - गुरु: "ॐ बृहस्पतये नमः स्वाहा"
     - शुक्र: "ॐ शुक्राय नमः स्वाहा"
     - शनि: "ॐ शनैश्चराय नमः स्वाहा"
     - राहु: "ॐ राहवे नमः स्वाहा"
     - केतु: "ॐ केतवे नमः स्वाहा"

7. **पूर्णाहुति**:
   - अंत में पूर्णाहुति दें। इसमें घी, हवन सामग्री, फल, और पुष्प अर्पित करें। "ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्" मंत्र का जाप करें।

8. **प्रसाद वितरण**:
   - हवन समाप्त होने के बाद प्रसाद का वितरण करें और सभी को हवन की आहुति का आशीर्वाद दें।

### हवन के बाद:

1. **शांति पाठ**:
   - हवन के बाद शांति पाठ करें: "ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षँ शान्तिः, पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वँ शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥"

2. **ध्यान और प्रार्थना**:
   - हवन के बाद कुछ समय के लिए ध्यान और प्रार्थना करें। अपनी मनोकामना को देवी दुर्गा के समक्ष रखें और आशीर्वाद प्राप्त करें।

गुप्त नवरात्रि में हवन करने से मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

गुप्त नवरात्रि 2024 की तिथियाँ इस प्रकार हैं मंत्र जाप हवन करने की विधि यूट्यूब चैनल ! sunnynath & guru gorakhnath मोबाइल : 9891595270

गुप्त नवरात्रि 2024 की तिथियाँ इस प्रकार हैं:

- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: 6 जुलाई 2024 से 14 जुलाई 2024

गुप्त नवरात्रि एक विशेष प्रकार की नवरात्रि होती है, जो मुख्य रूप से तंत्र साधना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह नवरात्रि आमतौर पर दो बार मनाई जाती है: एक बार माघ मास में और दूसरी बार आषाढ़ मास में।

गुप्त नवरात्रि में माता की सेवा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहाँ कुछ प्रमुख बातें हैं जो गुप्त नवरात्रि के दौरान की जाती हैं:

1. **मंत्र जप**: गुप्त नवरात्रि में देवी के विशेष मंत्रों का जप किया जाता है। इनमें दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलकम, और अन्य तांत्रिक मंत्र शामिल होते हैं।

2. **हवन और यज्ञ**: तंत्र साधना में हवन और यज्ञ का विशेष महत्व होता है। गुप्त नवरात्रि में माता के प्रिय सामग्री से हवन किया जाता है।

3. **तंत्र साधना**: इस नवरात्रि में तंत्र साधना करने वाले साधक विशेष पूजा और अनुष्ठान करते हैं। इसमें देवी के विशेष यंत्रों का पूजन, तांत्रिक मंत्रों का उच्चारण और विशेष विधियों का पालन किया जाता है।

4. **ध्यान और साधना**: गुप्त नवरात्रि में ध्यान और साधना का भी विशेष महत्व है। साधक ध्यान में बैठकर माता की आराधना करते हैं और मन को शुद्ध करते हैं।

5. **व्रत और उपवास**: इस दौरान व्रत और उपवास का पालन किया जाता है। साधक केवल सात्विक आहार ग्रहण करते हैं और कई बार सिर्फ फलाहार पर ही रहते हैं।
गुप्त नवरात्रि में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। यहाँ कुछ प्रमुख मंत्र दिए जा रहे हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रि के दौरान जाप किया जा सकता है:

1. **दुर्गा सप्तशती मंत्र**: 
   - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"
   - इस मंत्र का जाप दुर्गा सप्तशती पाठ के दौरान किया जाता है।

2. **दुर्गा बीज मंत्र**:
   - "ॐ दुं दुर्गायै नमः"
   - इस मंत्र का जाप माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

3. **महामृत्युंजय मंत्र**:
   - "ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
   - इस मंत्र का जाप शत्रुनाश और सुरक्षा के लिए किया जाता है।

4. **दुर्गा कवच**:
   - दुर्गा सप्तशती में वर्णित दुर्गा कवच का पाठ करने से सभी प्रकार की सुरक्षा प्राप्त होती है।

5. **सिद्ध कुंजिका स्तोत्र**:
   - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं हौं जूं सः। ॐ जयन्ति मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥"
   - यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का संक्षिप्त रूप माना जाता है और इसकी विशेष शक्ति होती है।

6. **देवी सूक्तम**:
   - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।"
   - यह एक शक्तिशाली तांत्रिक मंत्र है जो साधना के लिए उपयुक्त होता है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान मंत्र जाप करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:

- **नियमितता**: मंत्र जाप को नियमित रूप से एक ही समय पर और एक ही स्थान पर करना चाहिए।
- **संकल्प**: मंत्र जाप से पहले संकल्प लेना चाहिए और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर जाप करना चाहिए।
- **शुद्धता**: जाप के समय शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए।
- **ध्यान**: मंत्र जाप के समय ध्यान और एकाग्रता बनाये रखना चाहिए।

इन मंत्रों का जाप करने से गुप्त नवरात्रि में देवी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

6. **माता का श्रृंगार**: देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों का श्रृंगार किया जाता है। हर दिन अलग-अलग देवी के रूप की पूजा की जाती है।

गुप्त नवरात्रि का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि, मन की शांति और तंत्र साधना के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना है।




दुर्गा माता की पूजा करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन करें 9 APRIL 2024 KO NAVTARI PUJAN VIDHI EVAM MANTRA JAAP VIDHI

 दुर्गा माता की पूजा करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन करें:


1. **पूजा स्थल की तैयारी**: पूजा के लिए एक साफ और साधारण स्थान चुनें जहाँ आप पूजा कर सकें। ध्यान दें कि स्थान शुद्ध और स्वच्छ हो।


2. **पूजा सामग्री की तैयारी**: पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि दीप, धूप, अगरबत्ती, सुगंध, फूल, नरियल, फल, निवेदन के लिए प्रसाद, कंबल, कपड़े, रोली, मोली, गंगाजल आदि को तैयार करें।


3. **आरती की तैयारी**: दुर्गा माता की आरती के लिए आरती की थाली तैयार करें जिसमें दीपक, रोली, चावल, कुमकुम आदि हों।


4. **पूजा का समय चुनें**: दुर्गा माता की पूजा का समय चुनें, जो शुभ मुहूर्त हो। अक्षय तृतीया, नवरात्रि, अष्टमी, नवमी आदि पर्वों पर इस पूजा को विशेष रूप से किया जाता है।


5. **पूजा का विधान**: पूजा का विधान शुरू करें, दुर्गा माता की मूर्ति के सामने बैठकर। अपने मन को शुद्ध करें और देवी का आवाहन करें।


6. **पूजा का अवधान**: पूजा के दौरान ध्यान दें कि आप सारे विधान का पालन कर रहे हैं, और मन, वाच, और कर्म से यज्ञ कर रहे हैं।


7. **आरती**: पूजा के अन्त में दुर्गा माता की आरती उतारें, मंत्रों के साथ।


8. **प्रसाद बाँटें**: पूजा के बाद प्रसाद को सभी को बाँटें और स्वयं भी लें।


यह सभी धर्मिक विधियों का पालन करते हुए, आप दुर्गा माता की पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने पूजा अनुभव को विविध भक्ति गीतों, कथाओं और ध्यान के माध्यम से भी गहराते हुए इसका आनंद ले सकते हैं।


दुर्गा माता के मंत्रों में कुछ प्रमुख मंत्र हैं जो भक्तों द्वारा जप किए जाते हैं और उन्हें आशीर्वाद मिलता है। यहाँ कुछ प्रमुख दुर्गा माता के मंत्र हैं:


1. ॐ दुं दुर्गायै नमः (Om Dum Durgayai Namah)

2. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे (Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche)

3. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवी चामुण्डायै विच्चे (Om Aim Hreem Kleem Gloum Devi Chamundayai Vichche)

4. ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणी नमोऽस्तु ते।। (Om Sarva Mangala Mangalye Shive Sarvartha Sadhike. Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostute)

5. या देवी सर्वभूतेषु माँ दुर्गा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ (Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Durga Rupena Samsthita. Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah)


ये मंत्र दुर्गा माता की पूजा और जप में उपयोग किए जाते हैं। इनका नियमित जप करने से भक्त ध्यान में स्थिर होता है और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। जिसमें उन्हें सामर्थ्य, शक्ति और संजीवनी शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।






९ अप्रैल २०२४ को नवरात्रि का आठवां और नवमी तिथि होगी। इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के इस दिन को विशेष ध्यान और साधना के लिए समर्पित किया जा सकता है। यहां कुछ साधना की सुझाव दी जा रही हैं:

 ९ अप्रैल २०२४ को नवरात्रि का आठवां और नवमी तिथि होगी। इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के इस दिन को विशेष ध्यान और साधना के लिए समर्पित किया जा सकता है। यहां कुछ साधना की सुझाव दी जा रही हैं:


1. **माँ सिद्धिदात्री की पूजा:** नवरात्रि की नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन माँ दुर्गा को समर्पित रूप से पूजन करें, उनके चरणों में अर्पण करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।


2. **नवरात्रि कथा और कीर्तन:** इस दिन माँ दुर्गा की कथा सुनें और उनके गुण और महत्व के बारे में जानें। उनकी महिमा को गाने और उनके नाम का जप करें।


3. **मंत्र जप:** माँ दुर्गा के मंत्रों का जप करना भी उनकी कृपा को प्राप्त करने का एक अच्छा तरीका है। "ॐ दुं दुर्गायै नमः" और "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" ऐसे मंत्र हैं जो आप जप कर सकते हैं।


4. **सेवा और दान:** माँ दुर्गा की सेवा करना और गरीबों को भोजन, वस्त्र, आदि दान करना भी उनके प्रति आदर और श्रद्धा का प्रतीक होता है।


5. **ध्यान और प्रार्थना:** माँ दुर्गा के ध्यान में लगकर उनसे आपकी मनोकामनाओं को पूरा करने की प्रार्थना करें। उनसे आपके जीवन में शक्ति, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।


ये कुछ साधना की सुझाव हैं, लेकिन यदि आपके पास कोई विशेष गुरु या आध्यात्मिक आचार्य हैं, तो उनसे सलाह लेना भी उपयुक्त होगा। आपके भगवान दुर्गा के आशीर्वाद से आपका जीवन सफल और समृद्धिशाली हो।






नवरात्री पर हवन की आहुति कैसे डालते है कौन से मंत्रो का जाप करे 9 APRIL 2024 NAVRATRI MAIN HAWAN KARNE KI PURN VIDHI MANTRA JAAP

 नवरात्री पर हवन की आहुति डालने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:


1. **आहुति की तैयारी**: हवन के लिए आहुति के रूप में विभिन्न द्रव्यों को तैयार करें, जैसे कि घी, दूध, गौमूत्र, गुड़, धान्य, यज्ञोपवीत, फल आदि। इन्हें उपलब्ध कराएं।

2. **मंत्रों का जाप**: हवन के समय, विशेष मंत्रों का पाठ करें जो आहुति के समय उच्चारित किए जाते हैं। ये मंत्र हो सकते हैं विशेष देवी या देवताओं के लिए, जो नवरात्री के अवसर पर पूजनीय होते हैं। 


3. **आहुति का डालना**: मंत्रों के उच्चारण के बाद, आहुति को हवन कुंड में डालें। आहुति को दाहिने कोने से कुंड में डालें, जो अग्नि की दिशा में होता है। ध्यान रहे कि यह काम अधिक सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए, क्योंकि अग्नि के संपर्क में आहुति डालने पर सावधानी बरतनी चाहिए।


अब कुछ प्रमुख मंत्रों का उच्चारण निम्नलिखित हो सकता है:


1. **देवी दुर्गा के मंत्र**:

   - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।"

   - "सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।"


2. **नवदुर्गा के मंत्र**:

   - "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।"

   - "ॐ देवी महात्म्ययै नमः।"

   - "ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।"


3. **नवरात्री के नौ दिन के मंत्र**:

   - "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।"

   - "ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः।"

   - "ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।"


यदि आप किसी स्थानीय पंडित या पूजारी से सलाह लेते हैं, तो वे आपको सही मंत्रों और प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, ध्यान रहे कि आहुति के रूप में डाले जाने वाले द्रव्यों का चयन भी स्थानीय परंपराओं और आध्यात्मिक आदर्शों के आधार पर किया जाता है।




9 APRIAL 2024 नवरात्री पर हवन कैसे करते है NAVRATRI PAR HAWAN KARNE KI SARA VIDHI AISE HAWAN KARTE HAI

 नवरात्री के दौरान हवन करना एक प्रमुख परंपरा है जो धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ होती है। हवन करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:


1. **स्थान का चयन**: हवन करने के लिए एक शुद्ध और शांतिपूर्ण स्थान चुनें, जैसे कि मंदिर, पूजा गृह या विशेष यज्ञशाला।

2. **सामग्री की तैयारी**: हवन के लिए आवश्यक सामग्री जैसे हवन कुण्ड, द्रव्य, गोबर, अग्नि, गीदड़, गोमुख और हवन सामग्री का मिश्रण (हवन सामग्री का चयन मंदिर या पूजा विशेषज्ञ से प्राप्त करें) का आयोजन करें।

3. **पूजा की तैयारी**: पूजा करने के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि कलश, रोली, चावल, अगरबत्ती, दीपक, पुष्प, नारियल, धूप, प्रार्थना पुस्तक आदि का आयोजन करें।

4. **हवन कुण्ड की तैयारी**: हवन कुण्ड को साफ़ करें और उसमें गोबर या द्रव्य डालें। फिर उसमें अग्नि दान करें।

5. **मंत्रों का पाठ**: हवन के दौरान विशेष मंत्रों का पाठ करें, जैसे कि दुर्गा सप्तशती के मंत्र, नवरात्री के मंत्र आदि।

6. **हवन का आरंभ**: सभी सामग्री को ध्यानपूर्वक स्थानांतरित करें और फिर हवन कुण्ड के चारों ओर चक्कर करें, मंत्रों का पाठ करते हुए द्रव्यों को हवन करें।

7. **हवन के सामाप्ति**: मंत्रों के पाठ के बाद हवन का निर्णय करें और पूरे आत्मसमर्पण और श्रद्धाभाव से अग्नि में समर्पित करें।

8. **आरती और प्रसाद का वितरण**: हवन के बाद देवी माँ की आरती उतारें और प्रसाद को वितरित करें।

यदि आप पहली बार हवन कर रहे हैं, तो शुरुआत में एक अनुभवी व्यक्ति की मदद लेना उपयोगी हो सकता है ताकि आप सही तरीके से पूजा कर सकें। इसके अलावा, यदि आप किसी स्थानीय पंडित या पूजारी से सलाह लेते हैं, तो वे आपको सही दिशा और प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकते हैं।




गुप्त नवरात्रि में हवन कैसे किया जाता है 10 फरवरी 2024 से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि 18 फरवरी तक रहेगी gupt navratri ks siddh mantra jaap

आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ में सनी शर्मा एक बार फिर से आप सभी के लिए गुप्त नवरात्रि जो की 10 फरवरी 2024 को शुरू हो रही है दिन शनिवार को घट स्थापना का समय 8:45 से लेकर 10:10 तक रहेगा जिसमें आप लोग घट की स्थापना करके गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक क्रियाएं एवं तंत्र-मंत्र करने वाले संकल्प लेकर साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं गुप्त नवरात्रि में हवन करने के लिए हवन सामग्री लेकर उसमें देसी घी डालकर अथवा पंचमेवा का मिश्रण मिलकर आप लोगों को आम की लकड़ी के ऊपर हवन करना होता है जिस प्रकार से साधना का आप लोगों ने संकल्प लिया है उसी प्रकार से आप लोगों को संकल्प के अनुसार दसवां हिस्सा हवन करना पड़ता है जिन लोगों ने गुरमुख से मंत्र लिया है वह लोग गुरु के सानिध्य में गुरु के मार्गदर्शन में ही हवन का निर्माण कर हवन की क्रिया को पूर्ण करेंगे हवन करते वक्त कुछ नियमों की पालना करनी पड़ती है बस्तर इत्यादि आचमन एवं शरीर शुद्धिकरण कर कर ही आप लोगों को मंत्र का जाप करते हुए आहुति देनी होती है जिसमें सर्व देवता के नाम की आहुतियां भी जाती है ज्यादा जानकारी के लिए मेरा यूट्यूब चैनल सनी नाथ अथवा नया चैनल गुरु गोरखनाथ जिसका लिंक सनी नाथ चैनल के डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगा आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ

10 February 2024 se Gupt Navratri lag rahi hai kaise karen Gupt Navratri mein Puja Ghat sthapna ka samay

आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ में सनी शर्मा आप सभी के लिए एक जानकारी लेकर आया हूं 10 फरवरी 2024 से गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है घट स्थापना का समय 8:45 से लेकर 10:10 तक है आप घाट की स्थापना इस समय में कर सकते हो 18 फरवरी को समापन है गुप्त नवरात्रि का आप लोग गुरु मंत्र का जाप करके किसी भी देवी की पूजा अर्चना नवरात्रि में कर सकते हो दुर्गा माता काली माता मसानी माता मदानन माता पाथरी वाली माता उसके अलावा नवदुर्गा माता की पूजा भी आप लोग कर सकते हो पूजा में संकल्प चौथ बत्ती एवं नित्य कर्म में आप लोगों ने नियमों की पालना करनी है किसी भी प्रकार का नियम तोड़ना नहीं है जिसके कारण आप लोगों को साधना का फल नहीं मिलेगा जिन लोगों के पास गुरु मंत्र है गुरु के होने पर अरदास लगवा कर रुद्राक्ष की माला के ऊपर मंत्र का जाप कर सकते हैं आप व्रत करके भी साधन सिद्ध करके सवारी चौकिया एवं सिद्धियां प्राप्त कर सकते हो इस शुभ तिथि एवं पर्व ज्यादा जानकारी के लिए यूट्यूब चैनल सनी नाथ और गुरु गोरखनाथ को जरूर देखें आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ ।

सवारी बुलाने के लिए करे नवरात्रि को यह प्रयोग IS NAVRATRI PAR KHOLE APNI SAWARI DEVTAO KO SAR PAR BULANA HAI KARO YEH NIYAM

आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ में सनी शर्मा एक बार फिर से आप सभी के लिए सवारी बनाने का विधि विधान लेकर आया हूं यह प्रयोग आप लोग गुरु सानिध्य और गुरु कृपा से कर सकते हैं जिन लोगों के गुरु नहीं है वह लोग इस विधान का प्रयोग नहीं कर सकते हैं और ज्यादा जानकारी के लिए आप लोग मेरी वेबसाइट को अच्छे से पढ़ ले उसके बाद आप लोग मेरी यूट्यूब चैनल सनी नाथ पर जरूर विजिट करें और लाइफ़सेविंग सुनिए और बाकी की सारी सर्विस ऐड है इस पर साधना के अनुसार मेरा प्रसाद रहता है सवारी खोलने के लिए आप लोग निवारण मंत्र का प्रयोग कर सकते हो अथवा जिस भी दैविक शक्ति को आप अपने सर पर बुलाना चाहते हो उसी का अनुष्ठान संकल्प लेकर आप लोग इतने दिनों तक मंत्र जपोगे कितने दिनों तक नवरात्रि है 22 तारीख से लेकर 30 तारीख तक आप लोग संकल्प के दौरान हर एक नियम की पालना करते हुए कठोरता के साथ आप लोगों ने मंत्र विधान का प्रयोग करना है कोशिश करें ज्यादातर आप लोग आप जो है वह दो टाइम करें सुबह और शाम भोजन आप लोग एक समय ही ग्रहण करें और नवरात्रि पर पूर्ण विधि के अनुसार ही आप लोग विधान का प्रयोग अच्छे से लाए यानी कि आप लोग किसी भी क्रिया का प्रयोग तब तक नहीं कर सकते हैं जब तक आप लोगों को पूर्ण ज्ञान नहीं है तो ज्ञान के अनुसार ही चलें एवं गुरु कृपा दृष्टि में ही प्रयोग करें भूमि शयन अखंड ज्योत का प्रयोग करें या अपनी समर्थ अनुसार आप लोग जोत लगा सकते हो और जब तक पूर्ण रूप से संकल्प नहीं होता है किसी व्यक्ति के साथ आप लोगों ने अपना अनुभव बताना नहीं है किसी को कुछ बताने की जरूरत नहीं है पूर्ण रूप से विधिवत तरीके के साथ इस विधान का प्रयोग करके आप लोग साधना सिद्धि में सफल हो सकते हो रुकी हुई सवारियां चौकियां आपकी ओपन खेलने लग जाएगी और आप लोग यह कार्य मेरे से अरदास लगवा कर भी कर सकते हो जिसकी जानकारी मेरे यूट्यूब चैनल के डिस्क्रिप्शन बॉक्स मेरी वेबसाइट पर मिल जाएगी आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ सनी नाथ शर्मा  । https://sunnynathsharma.blogspot.com

चैत्र नवरात्रि 2023 तारीख और समय शुभ मुहूर्त एवं कलश स्थापना 2023 NAVRATRI PUJAN GHATSATHAPANA VIDHAN

आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ में सनी शर्मा एक बार फिर से आप सभी के लिए चैत नवरात्रि के 9 दिनों तक चलने वाले त्यौहार उस त्यौहार में आप कैसे पूजा भक्ति कर सकते हैं उसके लिए पोस्ट डालना जो लोग व्रत रखना चाहते हैं कलश स्थापना करना चाहते हैं चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि 21 मार्च को रात्रि 10:52 से शुरू हो रही है ऐसे में लोग कंफ्यूज है कि वह क्षेत्र मे नवरात्रि 21 मार्च से शुरू हो रही है या 22 मार्च से शुरू हो रही है चैत्र नवरात्रि का मुहूर्त दिनांक पंचांग के अनुसार घट स्थापना मुहूर्त सुबह 6:32 से लेकर 7:32 तक की है घट स्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि को आता है घट स्थापना मुहूर्त स्थापना का समय ऊपर बता दिया गया है प्रतिपदा तिथि का जो आरंभ है वह 21 मार्च 2023 को रात्रि 10:52 से शुरू हो जाएगा प्रतिपदा तिथि समापन 22 मार्च 2023 को रात्रि 8:20 पर हो जाएगा मीना लगन का परम 22 मार्च 2023 को सुबह 6:23 पर लगना है और मीना लग्न की जो समाप्ति है वह 22 मार्च 2 या 23 को सुबह 7:32 पर हो जाना तो इसी के दौरान ही आपको कलश की स्थापना करने चैत्र नवरात्रि जो है वह 9 रंगों का त्योहार इसमें दैविक शक्तियों को पूजा जाता है अलग-अलग प्रकार की विधि विधान ओं के साथ गुरुओं के संग में लोग पूजा करते हैं इसमें आप निवारण मंत्र गुरु के द्वारा दिए मंत्रों का जाप कर सकते हैं ।

चैत्र नवरात्रि 2023 की तिथियां

22 मार्च 2023 को शैलपुत्री माता 23 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी पूजा 24 मार्च को मां चंद्रघंटा की पूजा 25 मार्च को कुष्मांडा माता की पूजा 26 मार्च को मां स्कंदमाता की पूजा 27 मार्च को सत्यनी पूजा 28 मार्च को मां कालरात्रि की पूजा 29 मार्च को मां महागौरी की पूजा महा अष्टमी और 30 मार्च को नवमी मां सिद्धिदात्री पूजा दुर्गा पूजा रामनवमी और दसवां दिन नवरात्रि के प्रति का पान का किया चित्र नवरात्रि का दसवां दिन लोग उद्यापन के लिए प्रयोग में लाते है ।

गुप्त नवरात्रि पर मां काली की सवारी लेने वाला सिद्ध शाबर मंत्र जाप GUPT NAVRATRI PAR MAA KI SAWARI LENE KA JAAP

दर्शन हेतु श्री काली मन्त्र

आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ में सनी शर्मा एक बार फिर से आप सभी के लिए नवरात्रि पर मां काली की साधना लेकर आया हूं हर एक साधना को करने से पहले उस साधना के नियम गुरु से समझकर उन मंत्रों का प्रयोग करें जन कल्याण हेतु और लोगों का ज्ञान मनाने के लिए यहां पर पोस्ट डाले जाते हैं यह एक स्वयं अनुभूत मंत्र है इस मंत्र से प्रचंड रूप में मां काली आप को दर्शन देती है ज्यादा जानकारी के लिए मेरे यूट्यूब चैनल सनी नाथ पर जरूर विजिट करें सब्सक्राइब और बैल आइकन पर क्लिक करें और लाइव चैट में मेरे साथ आप लोग फ्री में बातचीत कर सकते हो अपने प्रश्नों का उत्तर अथवा साधना संबंधित कोई तकलीफ आ रही है दिक्कत आ रही है तो आप पूछ सकते हो बाकी की सारी सर्विस पेड़ है साधना के अनुसार ही मेरा भोग प्रसाद रहता है किसी भी मंत्र का जप करने से पहले आप लोग मेरे से अरदास लगवा कर उस मंत्र का पूर्ण रूप से लाभ उठा सकते हो बिना गुरु के मंत्र तंत्र करना खुद को मुसीबत में डालने वाली बात है यह साधना शनिवार से शुरू कर सकते हो अगर नवरात्रि को करनी है तो आप अष्टमी तक या नवमी तक इस मंत्र का प्रयोग कर सकते हो नवरात्रि में अखंड ज्योत लहसुन प्याज का त्याग भूमि पर सोना और ब्रह्मचार्य का नियम रुद्राक्ष की माला के ऊपर नीचे दिए गए मंत्र की नित्य 11 से अधिक माला का जाप करना है कुल में जैसे मां चलती है वैसा ही भाग लिया जाता है साधना में तामसिक भोग भी लगाया जाता है लेकिन नवरात्रि में सात्विक भाव भी देना है किसी ने तामसिक भोग नहीं लगाना है संकल्पित साधना करनी है गुरु मंत्र गणेश पूजन सर्व 33 कोटि देवी देवताओं के आगे दुआ फरियाद याद कर कर ही मंत्र सफलता के लिए दुआ करके इसका जाप करना है ज्यादा जानकारी के लिए जब अरदास लगाओगे तो आप लोग विधि विधान मेरे से समझ सकते हो आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ सनी नाथ शर्मा ।

डण्ड भुज-डण्ड, प्रचण्ड नो खण्ड प्रगट देवि, तुहि झुण्डन के झुण्ड खगर दिखा खप्पर लियां खड़ी कालका तागड़दे मस्तङ्ग तिलक मागरदे मस्तङ्ग चोला जरी का फागड़ दीफू गले फुल-माल जय जय जयन्त जय आदि-शक्ति जय कालका खपर-धनी जय मचकुट छन्दनी देव जय-जय महिरा, जय मरदिनी जय-जय चुण्ड-मुण्ड भण्डासुर-खण्डनी जय रक्त-बीज बिडाल-बिहण्डनी जय निशुम्भ को दलनी जय शिव राजेश्वरी अमृत-यज्ञ धागी-धृट, दृवड़ दृवड़नी बड़ रवि डर-डरनी ॐ ॐ ॐ।।”

कुलदेवी की सवारी लेने का मंत्र जाप कुल देवी की स्तुति मात्र 11 बार पढ़ने से होता है जीवन में चमत्कार KULDEVI KI SAWARI

कुल देवी स्तुति

आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ मैं सनी शर्मा एक बार फिर से कुलदेवी की सूती लेकर आया जिन लोगों को पता नहीं है उनकी कुलदेवी कौन है वह इस श्रुति को नित्य पढ़ते रहे तो उनको उनकी कुल देवी के दर्शन हो जाते हैं यह एक गुरुमुखी आदम की वाणी है इस का जाप करने से शत-प्रतिशत आपको कुल देवी के दर्शन होंगे इसमें गुरु कृपा और गुरु  आज्ञा भी है स्तुति करने से पहले आप लोग मेरे से अरदास जरूर लगवाएं क्योंकि कुछ मंत्र पीली कुल में चलते हैं वह बिना भोग के सिद्ध नहीं होते हैं क्योंकि गुरुओं के नाम का भोग देना ही पड़ता है इसका जाप आप अपनी सफलता अनुसार कर सकते हो अगर आप अपनी कुल देवी की कृपा अथवा दर्शन जल्दी से पाना चाहते हो तो आपको रोज 108 जाप करना पड़ेगा अन्यथा आपके ऊपर गुरु कृपा है तो आप इसको याद करके 11 बार कुल देवी के नाम का या उनके मंदिर या थान अगर आपको पता है तो नहीं पता है तो एक ज्योत प्रज्वलित करके आपने इस मंत्र का उसी जोत में अपनी कुलदेवी का ध्यान करते हुए जाप करना है स्वयं ही आपको जिस देवी के दर्शन होंगे वही आपकी कुल की देवी होगी कुलदेवी कुलदेवता पितर देवता इष्ट देवता और स्थान देखता साधना सिद्धि में इन 5 दवताओं का बहुत महत्व है इनके बिना इनकी कृपा के बिना उनकी इजाजत के बिना किसी भी व्यक्ति के ऊपर दैविक शक्तियों की कृपा नहीं होती ज्यादा जानकारी के लिए मेरे यूट्यूब चैनल सनी नाथ पर विजिट करें चरण को सब्सक्राइब बैल आइकन पर क्लिक करें लाइव चैट में मेरे साथ बात कर सकते हो लाइव सेशन आप लोगों के लिए उनको जरूर सुने समझे बाकी की सारी सर्विस चार्जेबल है पेड़ है साधना के अनुसार ही मेरा भोग प्रसाद रहता है आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ सनी नाथ शर्मा ।

ॐ सिमरु आदि गणेश, फिर पुजू गुरु महेश लिखूं कुल देवी स्तुति, आज्ञा दे गुरु महादेव नमो नमो कुलदेवी, नमो नमो गुरु महेश तुम हो कुल की देवी , तुम हो कुल की शान तुम बिन ना कोई सिद्ध हो, कुल का काज सुन लीजिए माँ कुलदेवी हमारी अब पुकार, हम हैं बच्चे तेरे लाडले आकर हम पर अब माँ कुलदेवी कृपा कर दीजिए  कष्ट पड़े जो उनको माँ समझ बच्चे सब हटा दीजिए तुम हो समस्त जगत की माँ सब जीव जंतुओं की पालनहार बलि लेना अब छोड़ दीजिए रोट, प्रसाद, कड़ाह माँ कुलदेवी अब बस स्वीकार कर लीजिए बच्चे समझ हुई जो गलतियां उनको अब माफ कीजिए पढे,सुने जो सुनाए कुल देवी स्तुति मिटे ग्रह कलेश सकल शत्रुओं का नाश हो हमेश ।


नवरात्रिओं में अगर यह स्वपन में दिखे तो आपकी साधना सफल हो चुकी है देवी मां की आपके ऊपर कृपा हो चुकी है

आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ में सनी शर्मा एक बार फिर से आप सभी के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आया हिंदू शास्त्र में और हिंदू संस्कृति कर्मकांड और भक्ताई पर चलती है जिसमें कुछ भगत जन भक्ति करते हैं देवी देवताओं की कृपा पाने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं उन परिश्रम का सपनों के माध्यम से उनको उत्तर मिलता है भक्ति गुरु सानिध्य में अथवा आप स्वयं भी कर सकते हैं कर्म कमाने के लिए किसी की इच्छा की जरूरत नहीं है जितना किसी को भूख लगती है वह स्वयं भोजन अपनी समरथा अनुसार करता है उसी प्रकार से भक्ति कर्म भी एक भूख की तरह ही होती है जितनी किसी की इच्छा है उतना ही उसका जाप करता है सपने में नवरात्रों में छोटी-छोटी बच्चियों का दिखना अथवा आपसे भोजन मांगना या खाने की कोई वस्तु मांगना वह देवी माता का आपको भोग का आदेश है वह मांग रही है आपने उनको कुछ भी मीठी वस्तु का भोग लगा देना साधना काल में या अथवा नवरात्रि में जो लोग व्रत कर रहे हैं देवी माताओं के और उनको सपने में छोटी छोटी बच्चियां उनकी गोद में बैठी दिखती हैं या स्वयं वह किसी देवी मां की मूर्ति के गोद में बैठी है या मूर्तियां माता की फोटो या माता के भजन कीर्तन यह स्वयं मास ग्रुप किसी स्त्री का आकर आपको आशीर्वाद देना यह सब भक्ताई कर्म का फल है आपकी साधना सफल हो चुकी है जो लोग कर्म करके जन कल्याण हेतु चलना चाहते हैं वह गुरु सानिध्य में चलेंगे गुरु के बिना गति नहीं है ज्यादा जानकारी के लिए मेरे यूट्यूब चैनल सनी नाथ पर विजिट करें चैनल को सब्सक्राइब करें और चैनल है गुरु गोरखनाथ शिव गोरक्ष लाइव चैट में बात करने के लिए सनी नाथ और नवनाथ 84 सिद्ध चैनल को सपोर्ट करें बाकी की जानकारी मेरी वेबसाइट पर और आपको मेरी यूट्यूब चैनल पर मिल जाएंगे बाकी की सारी सर्विस पेड़ है लाइव चैट में ही फ्री प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं आदेश आदेश ।

नवम नवरात्रि–मां सिद्धिदात्री मां सिद्धिदात्री की व्रत कथा–

जय माता दी

Sunny Nath Sharma

       नवम नवरात्रि–मां सिद्धिदात्री

मां सिद्धिदात्री की व्रत कथा–

देवीपुराण के अनुसार ये माता सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ है।भगवान शंकर ने भी इन्ही देवी की उपासना करके सभी सिद्धियों को प्राप्त कर था।इन्ही देवी के आशीर्वाद से भगवान शिव का शरीर आधा स्त्री का हुआ था तथा वह जग में अर्धनारीश्वर के रूप से विख्यात हुए। माता सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्रि के अंतिम दिन होती है। माता की कृपा प्राप्त करने के बाद कोई शेष इच्छा भक्तो के मन में नही बचती है।

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप–

मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर आसित होती हैं।

मां सिद्धिदात्री का मंत्र–

या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
: “ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः”

मां सिद्धिदात्री की आरती–

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक  तू दासों की माता, 
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि
कठिन  काम  सिद्ध  कराती  हो  तुम
हाथ  सेवक  के  सर  धरती  हो  तुम,
तेरी  पूजा  में  न  कोई  विधि  है
तू  जगदंबे  दाती  तू  सर्वसिद्धि  है
रविवार  को  तेरा  सुमरिन  करे  जो
तेरी  मूर्ति  को  ही  मन  में  धरे  जो, 
तू  सब  काज  उसके  कराती  हो  पूरे
कभी  काम  उस  के  रहे  न  अधूरे
तुम्हारी  दया  और  तुम्हारी  यह  माया
रखे  जिसके  सर  पैर  मैया  अपनी  छाया,
सर्व  सिद्धि  दाती  वो  है  भाग्यशाली
जो  है  तेरे  दर  का  ही  अम्बे  सवाली
हिमाचल  है  पर्वत  जहां  वास  तेरा
महानंदा मंदिर में है वास  तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता

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आठवा नवरात्रा–माता महागौरी माता महागौरी की व्रत कथा–

जय माता दी

Sunny Nath Sharma

          आठवा नवरात्रा–माता महागौरी

माता महागौरी की व्रत कथा–

महादेव को पति रूप में पाने के लिए माता ने कठोर तपस्या करी थी जिससे माता का रंग काला पड़ गया था। भगवान शंकर ने जब माता को स्वीकार करा तब उन्होंने माता के शरीर पर गंगाजल डाला जिससे माता का वर्ण स्वेत हो गया । तथा तभी से माता का नाम महागौरी पड़ गया।माता का वहां बैल या सिंह है।

माता महागौरी का स्वरूप–

माता गौरा अत्यंत ही करुणामई,शांत व सुंदर दिखती है। माता का वर्ण पूर्णता स्वेत है। माता की चार भुजाएं है।मां की मुद्रा अत्यन्त शांत है और ये अपने हाथों में डमरू, त्रिशूल धारण किए वर मुद्रा और अभय-मुद्रा धारिणी है।माता के वस्त्र व आभूषण भी सब स्वेत है।

माता महागौरी का मंत्र–

 श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

माता महागौरी की आरती–

जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो

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सातवा नवरात्र–मां कालरात्रि मां कालरात्रि व्रत कथा–

जय माता दी

Sunny Nath Sharma

          सातवा नवरात्र–मां कालरात्रि

मां कालरात्रि व्रत कथा–

नाम से ही समझा जा सकता है की यह शक्ति माता दुर्गा ने ऊर्ग रूप को दर्शाती है। इनका वर्ण घने अंधकार की तरह काला है व इनके गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। माता अपने भक्तो की काल से रक्षा करती है। भयानक दिखने के बावजूद भी माता के मन में प्रेम का सागर भरा पड़ा है।
यह माता भयंकर रूप धारण करने के बाद भी सदा ही शुभ करने वाली है ,इसके इनको शुभंकरी भी कहा जाता है।माता की पूजा से हर तरह की सिद्धियों के द्वार खुल जाते है।इस संसार में जितने भी भूत,प्रेत,अन्य असुरी शक्तियां है वह केवल माता का नाम स्मरण करने मात्र से ही दूर भाग जाती है।
माता कालरात्रि सदा ही मंगल करने वाली देवी है।

मां कालरात्रि का स्वरूप–

मां के बाल बिखरे हुए है,गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है।इन देवी के तीन नेत्र हैं।येcतीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं।इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है।यह गर्दभ की सवारी करती हैं।ऊपर उठे हुए दायने हाथ की
वर मुद्रा भक्तों को वर देती है।दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है ।बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का
कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है।

माता कालरात्रि का मंत्र–

एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

माता कालरात्रि की आरती–

कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुह से बचाने वाली ॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥
खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥
सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली माँ जिसे बचाबे ॥
तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि माँ तेरी जय ॥

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