जय गुरु गोरखनाथ चेतावनी:-इस लेख में वर्णित नियम ,सूत्र,व्याख्याए,तथ्य स्वयंके अभ्यास-अनुभव के आधार पर एवं गुरू-साधु-संतों के कथन,ज्योतिष-वास्तु-वैदिक-तांत्रिक-आध्यात्मिक-साबरी ग्रंथो,मान्यताओं और जानकारियों के आधार पर मात्र शैक्षणिक उद्देश्यों हेतु दी जाती है।हम इनकी पुष्टी नही करते,अतः बिना गुरु के निर्देशन के साधनाए या प्रयोग ना करे। ©कॉपी राइट एक्ट 1957) सनी नाथ शर्मा ! WHATSAAP:-+91-9891595270 youtube channel :- SUNNY NATH & 9 NATH 84 SIDH
नवरात्रि के दौरान कलश की स्थापना (कलश पूजन) एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। इसे इस प्रकार किया जाता है:
नवरात्रि के दौरान सबसे अधिक जपे जाने वाला मंत्र है:
शारदीय नवरात्रि में हवन करने की विधि और हवन सामग्री का पालन धार्मिक मान्यता और परंपराओं के अनुसार किया जाता है। यहाँ पर एक सामान्य विधि और सामग्री की सूची दी गई है:
नवरात्रि के दौरान हवन करने की विधि और किस देवता की आहुति डालनी है, यह आपकी व्यक्तिगत श्रद्धा और पूजा की परंपरा पर निर्भर करता है। सामान्यतः नवरात्रि के दौरान हवन विशेष रूप से माता दुर्गा की पूजा के लिए किया जाता है। यहाँ एक सामान्य विधि और आहुति देने के नियम दिए जा रहे हैं:
गुप्त नवरात्रि में हवन और संकल्प लेने की विधि और मंत्र जाप कैसे बनाए हवन कुण्ड गुप्त नवरात्रि में हवन करना विशेष महत्व रखता है। यहाँ हवन करने की एक सामान्य विधि दी जा रही है:
गुप्त नवरात्रि 2024 की तिथियाँ इस प्रकार हैं मंत्र जाप हवन करने की विधि यूट्यूब चैनल ! sunnynath & guru gorakhnath मोबाइल : 9891595270
दुर्गा माता की पूजा करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन करें 9 APRIL 2024 KO NAVTARI PUJAN VIDHI EVAM MANTRA JAAP VIDHI
दुर्गा माता की पूजा करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन करें:
1. **पूजा स्थल की तैयारी**: पूजा के लिए एक साफ और साधारण स्थान चुनें जहाँ आप पूजा कर सकें। ध्यान दें कि स्थान शुद्ध और स्वच्छ हो।
2. **पूजा सामग्री की तैयारी**: पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि दीप, धूप, अगरबत्ती, सुगंध, फूल, नरियल, फल, निवेदन के लिए प्रसाद, कंबल, कपड़े, रोली, मोली, गंगाजल आदि को तैयार करें।
3. **आरती की तैयारी**: दुर्गा माता की आरती के लिए आरती की थाली तैयार करें जिसमें दीपक, रोली, चावल, कुमकुम आदि हों।
4. **पूजा का समय चुनें**: दुर्गा माता की पूजा का समय चुनें, जो शुभ मुहूर्त हो। अक्षय तृतीया, नवरात्रि, अष्टमी, नवमी आदि पर्वों पर इस पूजा को विशेष रूप से किया जाता है।
5. **पूजा का विधान**: पूजा का विधान शुरू करें, दुर्गा माता की मूर्ति के सामने बैठकर। अपने मन को शुद्ध करें और देवी का आवाहन करें।
6. **पूजा का अवधान**: पूजा के दौरान ध्यान दें कि आप सारे विधान का पालन कर रहे हैं, और मन, वाच, और कर्म से यज्ञ कर रहे हैं।
7. **आरती**: पूजा के अन्त में दुर्गा माता की आरती उतारें, मंत्रों के साथ।
8. **प्रसाद बाँटें**: पूजा के बाद प्रसाद को सभी को बाँटें और स्वयं भी लें।
यह सभी धर्मिक विधियों का पालन करते हुए, आप दुर्गा माता की पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने पूजा अनुभव को विविध भक्ति गीतों, कथाओं और ध्यान के माध्यम से भी गहराते हुए इसका आनंद ले सकते हैं।
दुर्गा माता के मंत्रों में कुछ प्रमुख मंत्र हैं जो भक्तों द्वारा जप किए जाते हैं और उन्हें आशीर्वाद मिलता है। यहाँ कुछ प्रमुख दुर्गा माता के मंत्र हैं:
1. ॐ दुं दुर्गायै नमः (Om Dum Durgayai Namah)
2. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे (Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche)
3. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवी चामुण्डायै विच्चे (Om Aim Hreem Kleem Gloum Devi Chamundayai Vichche)
4. ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणी नमोऽस्तु ते।। (Om Sarva Mangala Mangalye Shive Sarvartha Sadhike. Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostute)
5. या देवी सर्वभूतेषु माँ दुर्गा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ (Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Durga Rupena Samsthita. Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah)
ये मंत्र दुर्गा माता की पूजा और जप में उपयोग किए जाते हैं। इनका नियमित जप करने से भक्त ध्यान में स्थिर होता है और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। जिसमें उन्हें सामर्थ्य, शक्ति और संजीवनी शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
९ अप्रैल २०२४ को नवरात्रि का आठवां और नवमी तिथि होगी। इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के इस दिन को विशेष ध्यान और साधना के लिए समर्पित किया जा सकता है। यहां कुछ साधना की सुझाव दी जा रही हैं:
९ अप्रैल २०२४ को नवरात्रि का आठवां और नवमी तिथि होगी। इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के इस दिन को विशेष ध्यान और साधना के लिए समर्पित किया जा सकता है। यहां कुछ साधना की सुझाव दी जा रही हैं:
1. **माँ सिद्धिदात्री की पूजा:** नवरात्रि की नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन माँ दुर्गा को समर्पित रूप से पूजन करें, उनके चरणों में अर्पण करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।
2. **नवरात्रि कथा और कीर्तन:** इस दिन माँ दुर्गा की कथा सुनें और उनके गुण और महत्व के बारे में जानें। उनकी महिमा को गाने और उनके नाम का जप करें।
3. **मंत्र जप:** माँ दुर्गा के मंत्रों का जप करना भी उनकी कृपा को प्राप्त करने का एक अच्छा तरीका है। "ॐ दुं दुर्गायै नमः" और "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" ऐसे मंत्र हैं जो आप जप कर सकते हैं।
4. **सेवा और दान:** माँ दुर्गा की सेवा करना और गरीबों को भोजन, वस्त्र, आदि दान करना भी उनके प्रति आदर और श्रद्धा का प्रतीक होता है।
5. **ध्यान और प्रार्थना:** माँ दुर्गा के ध्यान में लगकर उनसे आपकी मनोकामनाओं को पूरा करने की प्रार्थना करें। उनसे आपके जीवन में शक्ति, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।
ये कुछ साधना की सुझाव हैं, लेकिन यदि आपके पास कोई विशेष गुरु या आध्यात्मिक आचार्य हैं, तो उनसे सलाह लेना भी उपयुक्त होगा। आपके भगवान दुर्गा के आशीर्वाद से आपका जीवन सफल और समृद्धिशाली हो।
नवरात्री पर हवन की आहुति कैसे डालते है कौन से मंत्रो का जाप करे 9 APRIL 2024 NAVRATRI MAIN HAWAN KARNE KI PURN VIDHI MANTRA JAAP
नवरात्री पर हवन की आहुति डालने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:
1. **आहुति की तैयारी**: हवन के लिए आहुति के रूप में विभिन्न द्रव्यों को तैयार करें, जैसे कि घी, दूध, गौमूत्र, गुड़, धान्य, यज्ञोपवीत, फल आदि। इन्हें उपलब्ध कराएं।
2. **मंत्रों का जाप**: हवन के समय, विशेष मंत्रों का पाठ करें जो आहुति के समय उच्चारित किए जाते हैं। ये मंत्र हो सकते हैं विशेष देवी या देवताओं के लिए, जो नवरात्री के अवसर पर पूजनीय होते हैं।
3. **आहुति का डालना**: मंत्रों के उच्चारण के बाद, आहुति को हवन कुंड में डालें। आहुति को दाहिने कोने से कुंड में डालें, जो अग्नि की दिशा में होता है। ध्यान रहे कि यह काम अधिक सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए, क्योंकि अग्नि के संपर्क में आहुति डालने पर सावधानी बरतनी चाहिए।
अब कुछ प्रमुख मंत्रों का उच्चारण निम्नलिखित हो सकता है:
1. **देवी दुर्गा के मंत्र**:
- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।"
- "सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।"
2. **नवदुर्गा के मंत्र**:
- "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।"
- "ॐ देवी महात्म्ययै नमः।"
- "ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।"
3. **नवरात्री के नौ दिन के मंत्र**:
- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।"
- "ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः।"
- "ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।"
यदि आप किसी स्थानीय पंडित या पूजारी से सलाह लेते हैं, तो वे आपको सही मंत्रों और प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, ध्यान रहे कि आहुति के रूप में डाले जाने वाले द्रव्यों का चयन भी स्थानीय परंपराओं और आध्यात्मिक आदर्शों के आधार पर किया जाता है।
9 APRIAL 2024 नवरात्री पर हवन कैसे करते है NAVRATRI PAR HAWAN KARNE KI SARA VIDHI AISE HAWAN KARTE HAI
नवरात्री के दौरान हवन करना एक प्रमुख परंपरा है जो धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ होती है। हवन करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:
1. **स्थान का चयन**: हवन करने के लिए एक शुद्ध और शांतिपूर्ण स्थान चुनें, जैसे कि मंदिर, पूजा गृह या विशेष यज्ञशाला।
2. **सामग्री की तैयारी**: हवन के लिए आवश्यक सामग्री जैसे हवन कुण्ड, द्रव्य, गोबर, अग्नि, गीदड़, गोमुख और हवन सामग्री का मिश्रण (हवन सामग्री का चयन मंदिर या पूजा विशेषज्ञ से प्राप्त करें) का आयोजन करें।
3. **पूजा की तैयारी**: पूजा करने के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि कलश, रोली, चावल, अगरबत्ती, दीपक, पुष्प, नारियल, धूप, प्रार्थना पुस्तक आदि का आयोजन करें।
4. **हवन कुण्ड की तैयारी**: हवन कुण्ड को साफ़ करें और उसमें गोबर या द्रव्य डालें। फिर उसमें अग्नि दान करें।
5. **मंत्रों का पाठ**: हवन के दौरान विशेष मंत्रों का पाठ करें, जैसे कि दुर्गा सप्तशती के मंत्र, नवरात्री के मंत्र आदि।
6. **हवन का आरंभ**: सभी सामग्री को ध्यानपूर्वक स्थानांतरित करें और फिर हवन कुण्ड के चारों ओर चक्कर करें, मंत्रों का पाठ करते हुए द्रव्यों को हवन करें।
7. **हवन के सामाप्ति**: मंत्रों के पाठ के बाद हवन का निर्णय करें और पूरे आत्मसमर्पण और श्रद्धाभाव से अग्नि में समर्पित करें।
8. **आरती और प्रसाद का वितरण**: हवन के बाद देवी माँ की आरती उतारें और प्रसाद को वितरित करें।
यदि आप पहली बार हवन कर रहे हैं, तो शुरुआत में एक अनुभवी व्यक्ति की मदद लेना उपयोगी हो सकता है ताकि आप सही तरीके से पूजा कर सकें। इसके अलावा, यदि आप किसी स्थानीय पंडित या पूजारी से सलाह लेते हैं, तो वे आपको सही दिशा और प्रक्रिया में मार्गदर्शन कर सकते हैं।





