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शेषनाग साधना (नाग देवता साधना गुप्त विधान) सनी नाथ


सतनाम आदेश गुरु जी गुरु को आदेश आदेश 
 ब्रम्ह लीन ब्रम्ह ज्ञानी कालो के काल महाकाल 
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गंगा सनान मृगछाली हाथ मैं तिरसुल डमरू बाजे
भोलेनाथ का शेषनाग गल मैं साजे,विशाल रूप 
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देवता जी विराजो मेरे आंगन सुख दुःख मैं बनो  
सहाई  भोलेनाथ के रूप शिव गुरु गोरक्षनाथ 
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कार बोलो गुरु गोरखनाथ जी तेरी सदा ही जय 
जय कार सनी नाथ !

गुरु कृपा से अपने इन मंत्रो का प्रयोग करना है यह साधनाये गुरु सनाधिया मैं होती है इलसिए मैं मंत्र पूर्ण नहीं दिया है जानकारी अथवा गुरु ज्ञान के लिए मैं मंत्र के कुछ शब्द यहाँ दिए है गुरु ज्ञान गुरुमुखी होता है यह मंत्र शब्द आपको कही नहीं मिलने है क्युकी गुरु है तो ज्ञान है गुरु नहीं तो कुछ नहीं नाग देवता जिनके कुलदेवता है वो इस मंत्र से लैब उठा सकते है गुरु कृपा से आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ सनी नाथ शर्मा !



शेष नाग साधना (NAG DEVTA KI SADHANA ) BHOLENATH KE PRYAA GANO MAIN SE EK GAN KI SIDDHI



भगवान विष्णु के शैया के रूप में वर्णित शेष नाग की शक्तियाँ असीम हैं इन्हे सिद्ध कर लेने के उपरांत साधक अखंड सुख का स्वामी बन जाता है इस साधना के लिए सामग्री पहले एकत्र कर लें| जैसे चन्दन की लकड़ी का छोटा सा टुकड़ा श्वेत और नीला धागा जटायुक्त नारियल लाल और सफेद कपड़ा पंच मेवा फल हवन सामग्री आटा मिठाई यह साधना रविवार को संध्या काल सात बजे से दस बजे के मध्य करें सबसे पहले काष्ठ पीठिका पर पूर्व दिशा की ओर श्वेत वस्त्र बिछा दें उस पर एक फैला हुआ तांबे का पात्र  रखें उस पात्र पर चन्दन के टुकड़े को छोटे-छोटे टुकड़े कर बिछा दें| अब आटे से सात फन वाले सर्प की आकृति बनाएँ तथा उसे चन्दन के टुकड़ो के ऊपर स्थापित करें दें| उस पत्र के निकट शिव तथा विष्णु का विग्रह अथवा चित्र रखें शिव के चित्र के स्थान पर शिवलिंग भी स्थापित किया जा सकता है परंतु इनकी पूजा के बाद पंचामृत से अभिषेक अवश्य करें| ईशान कोण पर मनसा देवी को स्थापित करें| कलश के ऊपर नारियल स्थापित कर दें

भारतीय पूजा पद्धति एक नियम के अनुसार होती है जिसमे आवाहन के पश्चात प्राण-प्रतिशठा होती है  तत्पश्चात पंचोपचार तथा षोडशोपचार विधि का वर्णन है तथा नियमतः सबसे पहले गणेश जी को पूजा अर्पित की जाती है इसलए पंचोपचार विधि से गणेश जी की पूजा करें तत्पश्चात  शिव तथा विष्णु देव मनसा देवी की पूजा करें मनसा देवी को लाल वस्त्र अर्पित करें पुनः पंचोपचार पूजन शेषनाग देव को अर्पित करें| धूप, दीप नेवेध्य अर्पित करने के बाद शेषनाग देवता को पूंछ की ओर से दोनों रंगो का धागा अर्पित करें

 निम्नलिखित मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला पर करें

ओम शं-शं-शं शेषनाग देवतायै नमः

जाप समाप्त होने के उपरांत रुद्राक्ष गले में धारण कर लें दूसरे दिन प्रातः काल स्नान के बाद पुनः सभी का धूप दीप दिखाकर पूजन करें| अंत में सभी सामाग्री काष्ठ पीठिका पर बिची श्वेत कपड़े में बांधकर किसी नदी में प्रवाहित कर दें कलश का जल पूरे घर में सिक्त कर दें शेष नाग साधना से आर्थिक संकट दूर होता है तथा कर्ज से मुक्ति होती है परंतु यह साधना योग्य गुरु की देख रेख में करना ही श्रेयस्कर है|