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यह मंत्र संकटों से मुक्ति, रोग निवारण, और मानसिक शांति के लिए भी जाना जाता है। यहाँ ब्रजरंग बाण मंत्र

 ब्रजरंग बाण, भगवान हनुमान को समर्पित एक प्रचलित हिंदू धार्मिक मंत्र है। यह मंत्र भगवान हनुमान की कृपा, सुरक्षा और शक्ति के लिए जपा जाता है। यह मंत्र संकटों से मुक्ति, रोग निवारण, और मानसिक शांति के लिए भी जाना जाता है। यहाँ ब्रजरंग बाण मंत्र का एक छोटा सा उदाहरण है:


जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥


रामदूत अतुलित बलधामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥


यह मंत्र समर्पित है भगवान हनुमान के गुणों की प्रशंसा और उनकी महानता का वर्णन करते हुए। बहुत से लोग इस मंत्र को नियमित रूप से जपते हैं और इसका अनुभव करते हैं कि यह उन्हें मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति में मदद करता है।


ध्यान रखें कि हर धर्मिक अभ्यास को गहराई से समझना और समर्थन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ब्रजरंग बाण या किसी अन्य मंत्र के उपयोग में श्रद्धा, भक्ति, और समझदारी के साथ प्रारंभ करना चाहिए।




गोरख चालीसा भगवान गोरखनाथ की प्रशंसा करने वाली एक हिंदी भजन है। यह चालीसा उनके भक्तों द्वारा प्रतिदिन पाठ किया जाता है। निम्नलिखित है गोरख चालीसा का पाठ ।

जय गुरु गोरखनाथ, सदा सहाय ।
करहु कृपा जोरि जन पर, निसदिन हमारहि आहि गवाय ॥

जो कोई निन्दा करहि हमारी, सो नर चहिं सुधि माहि ।
ज्ञान बिना संतति नहिं कोई, जग में न भव भय काहि ॥१॥

जिन्ह की बिगटि कीन्ह कोई नहीं, साधक कहवाइ जाय ।
गोरखनाथ गुरु साधिक कीन्हा, सहज जोग लगायि ॥२॥

शंकर अचल राजा जोगी, जटाधार ब्रह्मा आधिक ।
तिन्ह को प्रणाम करहिं हम, तन मन धन जीवन अधिक ॥३॥

मन को संयम राखि लो, काम क्रोध अधिकारी ।
जिन्ह की पूजा मन से की, सब काम पुरारी ॥४॥

स्वामी बलवंत गोरख नाथ, चलत है जगत त्राणा ।
कैसी बड़ा भगतिहि होई, जित दृढ़ निश्चय नाम लगाया ॥५॥

महादेव की कृपा दृढ़ाई, गोरख नाथ अधिकारी ।
अभिमान निवारि संत सदन, भक्ति अनधिकारी ॥६॥

संत जन साधन जो न कीन्हा, ताकू जीवन अभागा ।
बिनु सत्संग के नहिं लाभा, उबरेंगे कौन दुखी भागा ॥७॥

गुरु गोरख चरन कमल, जिन्ह की ध्यान सुख धारी ।
देव धनवंत जन जीवा, सुनहु मेरी भवारी ॥८॥

अर्थ - सदा हमारे सहारे होने वाले गुरु गोरखनाथ को जय हो। हे जोगी राजा शंकर, जटाधारी ब्रह्मा, हम उनको प्रणाम करते हैं। वे हमारी रक्षा करने वाले हैं। वे सबका उद्धार करते हैं। गुरु गोरखनाथ के पावन चरणों को ध्यान में ले जो सुख की धारा बहा रहे हैं, वे देवों के समान धनवान और सुखी होते हैं। मेरी सुनो, हे भवानी, मेरे गुरु गोरखनाथ के पावन चरण।


🌱श्री तुलसी चालीसा 🌱 TULSI MATA KI CHALISHA PATH

🌱श्री तुलसी चालीसा 🌱          

                ।। दोहा ।।

श्री तुलसी महारानी,करु विनय सिरनाय।
 जो मम हो संकट विकट,दीजै मात नशाय।।

            ।। चौपाई ।।

नमो नमो तुलसी महारानी।
महिमा अमित न जाय बखानी।।

दियो विष्णु तुमको सनमाना।
जग में छायो सुयश महाना ।।

विष्णु प्रिया जय जयति भवानी।
तिहूं लोक की हो सुखखानी।।

भगवत पूजा कर जो कोई।
बिना तुम्हारे सफल न होई।।

जिस घर तव नहि होय निवासा।।
उस पर करहिं विष्णु नहि बासा।।

करे सदा जो तव नित सुमिरन।
तेहिके काज होय सब पूरन।।

कार्तिक मास महात्म तुम्हारा।
ताको जानत सब संसारा।।

तव पूजन जो करैं कुंवारी।
पावै सुंदर वर सुकुमारी ।।

कर जो पूजा नितप्रीति नारी ।
सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।।

वृद्धा नारी करे जो पूजन।
मिले भक्ति होवे पुलकित मन।।

श्रद्धा से पूजे जो कोई ।
भवनिधि से तर जावै सोई ।।

कथा भागवत यज्ञ करावै।
तुम विन नहीं साफलता पावै।।

छायो तब प्रताप जगभारी ।
ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।।

 तुम्हीं मात यंत्रन यंत्रन में।
 शकल काज सिधि होवै क्षण में।।

 औषधि रूप आप हो माता।
 सब जग में तब यश विखयाता।।


     🔥आरती श्री तुलसी जी की🔥

जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता।
सभी योगों के ऊपर,सब रोगों के ऊपर,
रूज से रक्षा करके भव त्राता।
जय जय तुलसी माता।

 बहू पुत्री है श्यामा,सूर वल्ली है ग्राम्या,
 विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे,सो नर तर जाता। 
जय जय तुलसी माता।।

हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित,पतित जनों की तारिणि, तुम हो विख्याथा। 
जय जय तुलसी माता ।।

लेकर जन्म विजन में आई दिव्य भवन में,मानव लोग तुम्ही से सुख संम्पत्ति पाता।
जय जय तुलसी माता।।


*आजतक आपने रती रताई हनुमान चालीसा तो बहुत सुनी और गाई भी होगी पर क्या आप जानते है उसका मतलब??? तो आइए आज मैं आपके लिए हनुमान चालीसा की हर एक पंक्ति का अर्थ लेकर आया हूं।*

आदेश आदेश

*YouTube Channel – Sunny Nath*

*आजतक आपने रती रताई हनुमान चालीसा तो बहुत सुनी और गाई भी होगी पर क्या आप जानते है उसका मतलब??? तो आइए आज मैं आपके लिए हनुमान चालीसा की हर एक पंक्ति का अर्थ लेकर आया हूं।*

*हनुमान चालीसा*


*श्री गुरु चरण सरोज रज,निज मन मुकुर सुधारी बरानऊं रघुवर बिमल जसु,जो दयाकु फल चारि*

अर्थ–मैं अपने मन रूपी दर्पण को गुरु महाराज के चरण कमलों की धूल से पवित्र करता हु और  रघुवीर जी के निर्मल यश का वर्णन करता हूं,जो चारों फल (अर्थ,धर्म,काम और मोक्ष) को देने वाला है।

*बुद्धिहीन तनु जानकी,सुमिरो पवन कुमार बल बुद्धि विद्या देहु मोहि,हरहु कलेश विकार*

अर्थ–है पवन पुत्र हनुमान जी ,मैं आपका सुमिरन करता हूं। मेरा शरीर और बुद्धि निर्मल है।आप मुझे शारीरिक बल,सद्बुद्धि और ज्ञान दीजिए व मेरे सारे दोषों और दुखों का निवारण कीजिए।

*सियावर राम जय जय राम,मेरे प्रभु राम जय जय राम*

*जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपीस तिहुं लोक उजागर*

अर्थ–प्रभु हनुमान जी आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर ! आपकी सदा ही जय जय कार हो। तीनो लोको (स्वर्ग लोक,भूलोक और पताल लोक) में आपको कीर्ति है।

*राम दूत अतुलित बल धामा अंजनी पुत्र पवनसुत नामा*

अर्थ–हे पवनपुत्र अंजनी नंदन! आपके समान कोई दूसरा बलवान नही।

*महावीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी*

अर्थ–हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप कुबुद्धि को दूर करते है। और आप सद्बुद्धि वाले लोगो का साथ देते हो।


 *कंचन बरन विराज सुबेसा कानन कुंडल कुंचित केसा*

अर्थ–आप सुनहरे रंग,सुंदर वस्त्र, कानों में कुंडल और गुंगरालू बालो से सुशोभित है।

 *हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे कांधे मूंज जनेऊ साजे*

अर्थ – आपके हाथ में ब्रज और ध्वजा है और कंधे पर मूंज के जनेहू की शोभा है।

*शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जग वंदन*

अर्थ–हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके बल और यश की पूरे संसार भर में वंदना होती है।

*विद्यावान गुनी अति चतुर राम काज करीबे को आतुर*

अर्थ–आप प्रकांड विद्या निधान है,गुणवान और अत्यंत कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।

*प्रभु चरित सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मन बसिया* 

अर्थ–आप श्री राम चरित सुनने में आनंद रस लेते है। श्री रामजी,सीताजी और लक्ष्मण जी आपके हृदय में वास करते है।

*सूक्ष्म रूप धरि सियाही दिखावा बिकट रुप धरि लंक जरावा*

अर्थ–आपके सीता मैया को आपका रूप बहुत ही ज्यादा छोटा करके दिखलाया था और लंका को बहुत ही बड़ा रूप बना कर जला डाला था।

*भीम रूप धरि असुर संहारे रामचंद्र जी के काज संवारे* 

अर्थ–आपने बहुत ही ज्यादा विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा था और श्री रामचंद्र जी के उपदेशों को सफल कराया ।

*लाय संजीवन लखन जीआए श्री रघुवीर हरषी उर लाये*

अर्थ–आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए थे,इससे प्रसन्न होकर प्रभु श्री राम ने आपको अपने हृदय से लगा लिया था।

*रघुपति किंही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई*

अर्थ –श्री राम जी ने तब आपकी बहुत ज्यादा प्रशंसा करी और कहा की आप उनके भरत जैसे ही भाई हो।

*सहस बदन तुम्हारो जस गावे अस कहि श्रीपति कंठ लगावे* 

अर्थ–श्री राम जी ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की आपका यश हजारों मुखों से भी सराहनीय है।

*सनकादिक ब्रह्मादी मुनीसा नारद सारद सहित अहिसा*

अर्थ –श्री सनक,श्री सनातन,श्री सनंदन,श्री सनतकुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी,सरस्वती माता,शेषनाग की सभी आपका गुण गान करते है।

*यम कुबेर दिगपाल जहां ते कवि कोबिद कहि सके कहां ते* 

अर्थ–यमराज जी,कुबेर जी आदि सब दिशाओं के रक्षक,कवि विद्वान,पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णत: वर्णन नही कर सकते।

*तुम उपकार सुग्रीवही किन्हा राम मिलाए राजपद दीन्हा*

अर्थ–आपने सुग्रीव जी को श्री राम जी से मिलाकर उपकार किया,जिसके कारण वे राजा बने।

*तुम्हारो मंत्र बिभीषण माना लंकेश्वर भए सब जग जाना*

अर्थ–पूरा संसार जानता है की आपके उपदेशों का विभीषण जी ने भी पालन करा जिसके कारण वह लंका के राजा बने।

*जुग सहस्त्र योजन पर भानू लिल्यो ताहि मधुर फल जानू*

अर्थ–जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस तक पहुंचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया था।

*प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही जलधि लांग गए अचरज नाही*

अर्थ–इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आपने श्री राम चंद्र जी की अंगूठी को मुंह में रखकर समुंद्र को लांग लिया।

*दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते* 

अर्थ –इस संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम क्यों न हो वह सब भी आपकी कृपा से सहजता से हो जाते है।

*राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे*

अर्थ–आप श्री राम जी के द्वार के रखवाले है,जिसमे आपकी आज्ञा के बिना किसी को भी प्रवेश नहीं मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।

*सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना*

अर्थ–जो भी आपकी शरण में आते है, उन सभी को आनंद प्राप्त होता है,और जब आप रक्षक है तो किसी का डर नही रहता।

*आपन तेज सम्हारो आपै तीनो लोक हांक ते कांपे*

अर्थ–आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता,आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते है।

*भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे* 

अर्थ–जहां भी आपके नाम का सुमिरन होता है , वहां पर भूत पिशाच नही फटक सकते।

*नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा* 

अर्थ–है प्रभु आपका निरंतर जप करने से सब रोग दूर हो जाते है और सारी पीड़ा मिट जाती है।

*संकट ते हनुमान झुड़ावे मन क्रम बचन ध्यान जो लावे*

अर्थ–है प्रभु! विचार करने में,कर्म करने में और बोलने में जिनका भी ध्यान आप में रहता है,उनको आप सब संकटों से बचाते हो।

*सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा*

अर्थ–तपस्वी राजा श्री रामचंद्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।

*और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे* 

अर्थ–जिस पर आपकी कृपा हो,वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।

*चारों जुग परताप तुम्हारा है प्रसिद्ध जगत उजियारा* 

अर्थ–चारो युगों (सतयुग,त्रेतायुग,द्वापरयुग,कलयुग) में आपका यश फैला हुआ है,जगत में आपकी कीर्ति सर्वदा प्रकाशमान है।

*साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे*

अर्थ–है प्रभु श्री राम जी के दुलारे! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।

*अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता*

अर्थ–आपको माता जानकी ने वर दिया है की आप किसी को भी अष्ट सिद्धियां और नव निधिया प्रदान कर सकते हो।

*राम रसायन तुम्हारे पासा सदा रहो रघुपति के दासा* 

अर्थ–आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है,जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम ओषधि है।

*तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावे*

अर्थ–आपका भजन करने से श्री राम जी की प्राप्ति होती है और जन्म जन्मांतर के दुख दूर होते है।

*अंत काल रघुबर पुर जाई जहां जन्म हरी भक्त कहाई* 

अर्थ–अंत समय में श्री राम जी के धाम को जाते है और यदि फिर जन्म लेगे तब भी भक्ति करके श्री राम भक्त ही कहलाएंगे।

*और देवता चित ना धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई*

अर्थ–हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है,फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।

*संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिरे हनुमत बलबीरा*

अर्थ–है प्रभु! जो भी आपका सुमिरन करते है उनके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा दूर हो जाती है।

*जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो गुरुदेव की नाई*

अर्थ–है प्रभु! आपकी जय हो,जय हो,जय हो, आप मुझ पर कृपालु श्री गुरुजी के समान कृपा कीजिए।

*जो सत बार पाठ कर कोई छूटे बंदी महा सुख होई* 

अर्थ–को कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जायेगा और उसे परमानंद मिलेगा।

*जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा* 

अर्थ–भगवान भोलेनाथ ने यह हनुमान चालीसा लिखवाई,इसलिए वह साक्षी है की को भी इसको पढ़ेगा उसको निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

*तुलसीदास सदा हरी चेरा कीजै नाथ हृदय महं डेरा* 

अर्थ–है प्रभु! तुलसीदास जी सदा ही श्री राम जी के दास है,इसलिए आप उनके हृदय में निवास कीजिए।

*पवन तनय संकट हरन, मंगल मूर्ति रुप राम लखन सीता सहित ,हृदय बसहु सुर भूप*

अर्थ–है संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलो के स्वरूप हो। है देवराज! आप श्री राम जी,सीता जी और लक्ष्मण जी सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

*सियावर राम जय जय राम,मेरे प्रभु राम जय जय राम*

*आशा करता हूं,आपको मेरे द्वारा दी हुई जानकारी अच्छी लगी होगी।*
*आप मेरी यूट्यूब चैनल ,“SUNNY NATH” को भी सब्सक्राइब करें,वहां पर आप लाइव चैट में जुड़ कर मेरे से फ्री में बातचीत कर सकते है।*
*मेरा नंबर ,वेबसाइट और मेरे चैनल दोनो पर ही है।*
*किसी भी क्रिया/साधना को करने के लिए आप मेरे साथ संपर्क कर सकते है। मेरी सारी सर्विसेज पैड है।*

आदेश आदेश

*SUNNY NATH SHARMA*

*पितृ स्तोत्र का हिंदी अनुवाद* PIRTO KI SEWA PITRO KA HINDI MAIN ANUBADH

आदेश आदेश

*YouTube Channel - Sunny Nath*

*पितृ स्तोत्र का हिंदी अनुवाद*

जो सबके द्वारा पूजित है,अमूर्त है,अत्यंत तेजस्वी है,ध्यानी तथा दिव्यदृष्टि सम्पन्न है, उन पितरों को मैं सदा सर्वदा नमस्कार करता हूं।

जो इंद्र आदि देवताओं,दक्ष,मारीच, सप्तृषियो तथा दूसरों के भी नेता है, कामनायो की पूर्ति करने वाले उन पितरों को मैं नमस्कार करता हूं।

जो मनु आदि राजश्रियो,मुनीश्वरो तथा सूर्य और चंद्रमा के भी नायक है, उन समस्त पितरों को मैं जल और समुंद्र में भी नमस्कार करता हूं।

नक्षत्रो, ग्रहों,वायु,अग्नि,आकाश और घुलौक तथा पृथ्वी के भी जो नेता है, उन पितरों को मैं हाथ जोड़ कर प्रणाम करता हूं।

जो देवऋषियो के जन्मदाता,समस्त लोकों द्वारा वंदित तथा सदा अक्षय फल के दाता है, उन पितरों को मैं हाथ जोड़ कर प्रणाम करता हूं।

जो पितृ प्रजापति,कश्यप, सोम,वरुण तथा योगेश्वरो के रूप में स्थित है,उनको मैं सदा हाथ जोड़ कर प्रणाम करता हूं।

सातों लोकों में स्थित जो सात पितृगण हैं उनको मैं नमस्कार करता हूं। मैं योगदृष्टि सम्पन्न स्वंभू ब्रह्माजी को प्रणाम करता हूं।

चंद्रमा के आधार पर प्रतिष्ठित तथा योगमूर्ति पितृगणों को मैं नमस्कार करता हूं।साथ ही मैं संपूर्ण जगत के पिता सोम को भी नमस्कार करता हूं।

अग्निस्वरूप अन्य पितरों को मैं नमस्कार करता हूं, क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत अग्नि और सोममय है।

जो पितृ तेज में स्थित है, जो यह चंद्रमा,सूर्य और अग्नि के रूप में दृष्टिगोचर होते है तथा जो जगतस्वरूप एव ब्रह्मस्वरूप है, उन संपूर्ण योगी पितरों को मैं एकाग्रचित होकर प्रणाम करता हूं। उनको बारंबार नमस्कार है। वह स्वाधाभोजी पितृ मुझ पर प्रसन्न हों।

*पितृ स्तोत्र समाप्त*

*आशा करता हूं,आपको मेरे द्वारा दी हुई जानकारी अच्छी लगी होगी।*
*आप मेरी यूट्यूब चैनल ,“SUNNY NATH” को भी सब्सक्राइब करें,वहां पर आप लाइव चैट में जुड़ कर मेरे से फ्री में बातचीत कर सकते है।*
*मेरा नंबर ,वेबसाइट और मेरे चैनल दोनो पर ही है।*
*किसी भी क्रिया/साधना को करने के लिए आप मेरे साथ संपर्क कर सकते है। मेरी सारी सर्विसेज पैड है।*

आदेश आदेश

*SUNNY NATH SHARMA*

*हनुमान चालीसा**श्री गुरु चरण सरोज रज,निज मन मुकुर सुधारी बरानऊं रघुवर बिमल जसु,जो दयाकु फल चारि*

आदेश आदेश

*YouTube Channel – Sunny Nath*

*आजतक आपने रती रताई हनुमान चालीसा तो बहुत सुनी और गाई भी होगी पर क्या आप जानते है उसका मतलब??? तो आइए आज मैं आपके लिए हनुमान चालीसा की हर एक पंक्ति का अर्थ लेकर आया हूं।*

*हनुमान चालीसा*


*श्री गुरु चरण सरोज रज,निज मन मुकुर सुधारी बरानऊं रघुवर बिमल जसु,जो दयाकु फल चारि*

अर्थ–मैं अपने मन रूपी दर्पण को गुरु महाराज के चरण कमलों की धूल से पवित्र करता हु और रघुवीर जी के निर्मल यश का वर्णन करता हूं,जो चारों फल (अर्थ,धर्म,काम और मोक्ष) को देने वाला है।

*बुद्धिहीन तनु जानकी,सुमिरो पवन कुमार बल बुद्धि विद्या देहु मोहि,हरहु कलेश विकार*

अर्थ–है पवन पुत्र हनुमान जी ,मैं आपका सुमिरन करता हूं। मेरा शरीर और बुद्धि निर्मल है।आप मुझे शारीरिक बल,सद्बुद्धि और ज्ञान दीजिए व मेरे सारे दोषों और दुखों का निवारण कीजिए।

*सियावर राम जय जय राम,मेरे प्रभु राम जय जय राम*

*जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपीस तिहुं लोक उजागर*

अर्थ–प्रभु हनुमान जी आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर ! आपकी सदा ही जय जय कार हो। तीनो लोको (स्वर्ग लोक,भूलोक और पताल लोक) में आपको कीर्ति है।

*राम दूत अतुलित बल धामा अंजनी पुत्र पवनसुत नामा*

अर्थ–हे पवनपुत्र अंजनी नंदन! आपके समान कोई दूसरा बलवान नही।

*महावीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी*

अर्थ–हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप कुबुद्धि को दूर करते है। और आप सद्बुद्धि वाले लोगो का साथ देते हो।


 *कंचन बरन विराज सुबेसा कानन कुंडल कुंचित केसा*

अर्थ–आप सुनहरे रंग,सुंदर वस्त्र, कानों में कुंडल और गुंगरालू बालो से सुशोभित है।

 *हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे कांधे मूंज जनेऊ साजे*

अर्थ – आपके हाथ में ब्रज और ध्वजा है और कंधे पर मूंज के जनेहू की शोभा है।

*शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जग वंदन*

अर्थ–हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके बल और यश की पूरे संसार भर में वंदना होती है।

*विद्यावान गुनी अति चतुर राम काज करीबे को आतुर*

अर्थ–आप प्रकांड विद्या निधान है,गुणवान और अत्यंत कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।

*प्रभु चरित सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मन बसिया* 

अर्थ–आप श्री राम चरित सुनने में आनंद रस लेते है। श्री रामजी,सीताजी और लक्ष्मण जी आपके हृदय में वास करते है।

*सूक्ष्म रूप धरि सियाही दिखावा बिकट रुप धरि लंक जरावा*

अर्थ–आपके सीता मैया को आपका रूप बहुत ही ज्यादा छोटा करके दिखलाया था और लंका को बहुत ही बड़ा रूप बना कर जला डाला था।

*भीम रूप धरि असुर संहारे रामचंद्र जी के काज संवारे* 

अर्थ–आपने बहुत ही ज्यादा विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा था और श्री रामचंद्र जी के उपदेशों को सफल कराया ।

*लाय संजीवन लखन जीआए श्री रघुवीर हरषी उर लाये*

अर्थ–आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए थे,इससे प्रसन्न होकर प्रभु श्री राम ने आपको अपने हृदय से लगा लिया था।

*रघुपति किंही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई*

अर्थ –श्री राम जी ने तब आपकी बहुत ज्यादा प्रशंसा करी और कहा की आप उनके भरत जैसे ही भाई हो।

*सहस बदन तुम्हारो जस गावे अस कहि श्रीपति कंठ लगावे* 

अर्थ–श्री राम जी ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की आपका यश हजारों मुखों से भी सराहनीय है।

*सनकादिक ब्रह्मादी मुनीसा नारद सारद सहित अहिसा*

अर्थ –श्री सनक,श्री सनातन,श्री सनंदन,श्री सनतकुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी,सरस्वती माता,शेषनाग की सभी आपका गुण गान करते है।

*यम कुबेर दिगपाल जहां ते कवि कोबिद कहि सके कहां ते* 

अर्थ–यमराज जी,कुबेर जी आदि सब दिशाओं के रक्षक,कवि विद्वान,पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णत: वर्णन नही कर सकते।

*तुम उपकार सुग्रीवही किन्हा राम मिलाए राजपद दीन्हा*

अर्थ–आपने सुग्रीव जी को श्री राम जी से मिलाकर उपकार किया,जिसके कारण वे राजा बने।

*तुम्हारो मंत्र बिभीषण माना लंकेश्वर भए सब जग जाना*

अर्थ–पूरा संसार जानता है की आपके उपदेशों का विभीषण जी ने भी पालन करा जिसके कारण वह लंका के राजा बने।

*जुग सहस्त्र योजन पर भानू लिल्यो ताहि मधुर फल जानू*

अर्थ–जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस तक पहुंचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया था।

*प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही जलधि लांग गए अचरज नाही*

अर्थ–इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आपने श्री राम चंद् र जी की अंगूठी को मुंह में रखकर समुंद्र को लांग लिया।

*दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते* 

अर्थ –इस संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम क्यों न हो वह सब भी आपकी कृपा से सहजता से हो जाते है।

*राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे*

अर्थ–आप श्री राम जी के द्वार के रखवाले है,जिसमे आपकी आज्ञा के बिना किसी को भी प्रवेश नहीं मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।

*सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना*

अर्थ–जो भी आपकी शरण में आते है, उन सभी को आनंद प्राप्त होता है,और जब आप रक्षक है तो किसी का डर नही रहता।

*आपन तेज सम्हारो आपै तीनो लोक हांक ते कांपे*

अर्थ–आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता,आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते है।

*भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे* 

अर्थ–जहां भी आपके नाम का सुमिरन होता है , वहां पर भूत पिशाच नही फटक सकते।

*नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा* 

अर्थ–है प्रभु आपका निरंतर जप करने से सब रोग दूर हो जाते है और सारी पीड़ा मिट जाती है।

*संकट ते हनुमान झुड़ावे मन क्रम बचन ध्यान जो लावे*

अर्थ–है प्रभु! विचार करने में,कर्म करने में और बोलने में जिनका भी ध्यान आप में रहता है,उनको आप सब संकटों से बचाते हो।

*सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा*

अर्थ–तपस्वी राजा श्री रामचंद्र जी सबसे श्रेष्ठ है,उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।

*और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे* 

अर्थ–जिस पर आपकी कृपा हो,वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।

*चारों जुग परताप तुम्हारा है प्रसिद्ध जगत उजियारा* 

अर्थ–चारो युगों (सतयुग,त्रेतायुग,द्वापरयुग,कलयुग) में आपका यश फैला हुआ है,जगत में आपकी कीर्ति सर्वदा प्रकाशमान है।

*साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे*

अर्थ–है प्रभु श्री राम जी के दुलारे! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।

*अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता*

अर्थ–आपको माता जानकी ने वर दिया है की आप किसी को भी अष्ट सिद्धियां और नव निधिया प्रदान कर सकते हो।

*राम रसायन तुम्हारे पासा सदा रहो रघुपति के दासा* 

अर्थ–आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है,जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम ओषधि है।

*तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावे*

अर्थ–आपका भजन करने से श्री राम जी की प्राप्ति होती है और जन्म जन्मांतर के दुख दूर होते है।

*अंत काल रघुबर पुर जाई जहां जन्म हरी भक्त कहाई* 

अर्थ–अंत समय में श्री राम जी के धाम को जाते है और यदि फिर जन्म लेगे तब भी भक्ति करके श्री राम भक्त ही कहलाएंगे।

*और देवता चित ना धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई*

अर्थ–हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है,फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।

*संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिरे हनुमत बलबीरा*

अर्थ–है प्रभु! जो भी आपका सुमिरन करते है उनके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा दूर हो जाती है।

*जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो गुरुदेव की नाई*

अर्थ–है प्रभु! आपकी जय हो,जय हो,जय हो, आप मुझ पर कृपालु श्री गुरुजी के समान कृपा कीजिए।

*जो सत बार पाठ कर कोई छूटे बंदी महा सुख होई* 

अर्थ–को कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जायेगा और उसे परमानंद मिलेगा।

*जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा* 

अर्थ–भगवान भोलेनाथ ने यह हनुमान चालीसा लिखवाई,इसलिए वह साक्षी है की को भी इसको पढ़ेगा उसको निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

*तुलसीदास सदा हरी चेरा कीजै नाथ हृदय महं डेरा* 

अर्थ–है प्रभु! तुलसीदास जी सदा ही श्री राम जी के दास है,इसलिए आप उनके हृदय में निवास कीजिए।

*पवन तनय संकट हरन, मंगल मूर्ति रुप राम लखन सीता सहित ,हृदय बसहु सुर भूप*

अर्थ–है संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलो के स्वरूप हो। है देवराज! आप श्री राम जी,सीता जी और लक्ष्मण जी सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

*सियावर राम जय जय राम,मेरे प्रभु राम जय जय राम*

*आशा करता हूं,आपको मेरे द्वारा दी हुई जानकारी अच्छी लगी होगी।*
*आप मेरी यूट्यूब चैनल ,“SUNNY NATH” को भी सब्सक्राइब करें,वहां पर आप लाइव चैट में जुड़ कर मेरे से फ्री में बातचीत कर सकते है।*
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*किसी भी क्रिया/साधना को करने के लिए आप मेरे साथ संपर्क कर सकते है। मेरी सारी सर्विसेज पैड है।*

आदेश आदेश

*SUNNY NATH SHARMA*


*हनुमान चालीसा* HANUMANT CHALISHA JAAP

आदेश आदेश

*YouTube Channel – Sunny Nath*

*हनुमान चालीसा*

श्री गुरु चरण सरोज रज,निज मन मुकुर सुधारी
 बरानऊं रघुवर बिमल जसु,जो दयाकु फल चारि 
बुद्धिहीन तनु जानकी,सुमिरो पवन कुमार 
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि,हरहु कलेश विकार 

*सियावर राम जय जय राम,मेरे प्रभु राम जय जय राम*

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर 
जय कपीस तिहुं लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा 
अंजनी पुत्र पवनसुत नामा 
महावीर विक्रम बजरंगी
 कुमति निवार सुमति के संगी
 कंचन बरन विराज सुबेसा
 कानन कुंडल कुंचित केसा
 हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे 
कांधे मूंज जनेऊ साजे
 शंकर सुवन केसरी नंदन 
तेज प्रताप महा जग वंदन
विद्यावान गुनी अति चतुर 
राम काज करीबे को आतुर
 प्रभु चरित सुनिबे को रसिया 
राम लखन सीता मन बसिया 
सूक्ष्म रूप धरि सियाही दिखावा
बिकट रुप धरि लंक जरावा 
भीम रूप धरि असुर संहारे 
रामचंद्र जी के काज संवारे 
लाय संजीवन लखन जीआए
श्री रघुवीर हरषी उर लाये 
रघुपति किंही बहुत बड़ाई 
तुम मम प्रिय भरत सम भाई 
सहस बदन तुम्हारो जस गावे
अस कहि श्रीपति कंठ लगावे 
सनकादिक ब्रह्मादी मुनीसा
नारद सारद सहित अहिसा
यम कुबेर दिगपाल जहां ते 
कवि कोबिद कहि सके कहां ते 
तुम उपकार सुग्रीवही किन्हा 
राम मिलाए राजपद दीन्हा
तुम्हारो मंत्र बिभीषण माना 
लंकेश्वर भए सब जग जाना 
जुग सहस्त्र योजन पर भानू 
लिल्यो ताहि मधुर फल जानू 
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही 
जलधि लांग गए अचरज नाही
दुर्गम काज जगत के जेते 
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते 
राम दुआरे तुम रखवारे 
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहे तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहू को डरना
आपन तेज सम्हारो आपै 
तीनो लोक हांक ते कांपे
भूत पिशाच निकट नहीं आवे 
महावीर जब नाम सुनावे 
नासे रोग हरे सब पीरा 
जपत निरंतर हनुमत बीरा 
संकट ते हनुमान झुड़ावे 
मन क्रम बचन ध्यान जो लावे
सब पर राम तपस्वी राजा 
तिनके काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावे 
सोई अमित जीवन फल पावे 
चारों जुग परताप तुम्हारा
है प्रसिद्ध जगत उजियारा 
साधु संत के तुम रखवारे 
असुर निकंदन राम दुलारे 
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता 
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हारे पासा 
सदा रहो रघुपति के दासा 
तुम्हरे भजन राम को पावै 
जनम जनम के दुख बिसरावे
अंत काल रघुबर पुर जाई 
जहां जन्म हरी भक्त कहाई 
और देवता चित ना धरई 
हनुमत सेई सर्व सुख करई 
संकट कटे मिटे सब पीरा 
जो सुमिरे हनुमत बलबीरा 
जय जय जय हनुमान गोसाई
कृपा करो गुरुदेव की नाई 
जो सत बार पाठ कर कोई 
छूटे बंदी महा सुख होई 
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा 
होय सिद्धि साखी गौरीसा 
तुलसीदास सदा हरी चेरा 
कीजै नाथ हृदय महं डेरा 

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूर्ति रुप 
राम लखन सीता सहित ,हृदय बसहु सुर भूप

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*SUNNY NATH SHARMA*

💦 आरती माँ गंगा जी की 💦 GANGA MATA KI AARTI

💦 आरती माँ गंगा जी की 💦


जय गंगे माता,मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याना,मन वांशित फल पाता।।
ॐ जय गंगे माता........

चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी,जल निर्मल आता। शरण पडे जो तेरी,सो नर तर जाता।।
ॐ जय गंगे माता........

पुत्र सगर के तारे,सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि हो तुम्हारी,त्रिभुवन सुखदाता।।
ॐ जय गंगे माता.......

एक बार ही जो तेरी,शरणागति आता।
यम की त्रास मिटाकर,परम गति पता।।
ॐ जय गंगे माता......

आरती मात तुम्हारी,जो जान नित्त जाता। दास वाही सहज में,मुक्ति को पाता।।
ॐ जय गंगे माता.......

ॐ जय गंगे माता,श्री गंगे माता।
 जो नर तुमको ध्‍याता,मन वांछित फल पाता।।
ॐ जय गंगे माता......

अहोई माता की आरती* AAHOI MATA KI AARTI

आदेश आदेश

*सनी नाथ शर्मा*
 
*अहोई माता की आरती*

इस साल अहोई अष्टमी व्रत 17 अक्टूबर को पड़ रहा है।इस दिन माताएं निर्जल व्रत रखकर अपने संतान की लंबी आयु की कामना करती है।

*अहोई माता की आरती*

जय अहोई माता,
जय अहोई माता ।
तुमको निस दिन ध्यावत,
 हर विष्णु विधाता।।
जय अहोई माता....

ब्रह्माणी,रूद्राणी ,कमला ,
तुम ही जग माता।
सूर्य चंद्रमा दयावत,
नारद ऋषि गाता।।
जय अहोई माता...

माता रूप निरंजन ,
सुख संपति दाता।
जो कोई तुमको ध्यवत, 
नित मंगल पाता।।
जय अहोई माता....

तू ही पताल बसंती, 
तू ही शुभदाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशन,
जगनिधि से त्राता।।
जय अहोई माता...

जिस घर तुम्हारो वासा,
वहीं में गुण आता।
कर न सके कोई कर ले,
मन नही घबराता।।
जय अहोई माता...

तुम बिन सुख न होवे,
पुत्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव ,
तुम बिन नहीं आता।।
जय अहोई माता...

शुभ गुण सुंदर युक्ता,
 क्षीर निधि जाता।
रत्न चतुर्दस तोकू ,
कोई नही पता।।
जय अहोई माता....

श्री अहोई माता की आरती,
जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे,
पाप उतर जाता।।
जय अहोई माता...

*जय अहोई माता की*

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आदेश आदेश

*SUNNY NATH SHARMA*

महिषासुर मार्दिनीस्त्रोतम

जय माता दी

Sunny Nath Sharma

महिषासुर मार्दिनीस्त्रोतम 

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते 
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते 

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते 
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते 
निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते 
दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे
दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते 
शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके 
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते 
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते 

जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते 
सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते
शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते 
अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले 
अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते 
निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते 
सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते 
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते 

पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् 
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् 
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते 
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते 

अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते 
यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते

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SUNNY NATH SHARMA

शिव कृत दुर्गा स्तोत्र*

जय माता दी

 *Sunny Nath Sharma*

                *शिव कृत दुर्गा स्तोत्र*

 रक्ष रक्ष महादेवि दुर्गे दुर्गतिनाशिनि 

मां भक्तमनुरक्तं च शत्रुग्रस्तं कृपामयि 

विष्णुमाये महाभागे नारायणि सनातनि

ब्रह्मस्वरूपे परमे नित्यानन्दस्वरूपिणि 

त्वं च ब्रह्मादिदेवानामम्बिके जगदम्बिके 

त्वं साकारे च गुणतो निराकारे च निर्गुणात् 

मायया पुरुषस्त्वं च मायया प्रकृतिः स्वयम् 

तयोः परं ब्रह्म परं त्वं विभर्षि सनातनि 

वेदानां जननी त्वं च सावित्री च परात्परा 

वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः सर्वसम्पत्स्वरूपिणी 

मर्त्यलक्ष्मीश्च क्षीरोदे कामिनी शेषशायिनः 

स्वर्गेषु स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं राजलक्ष्मीश्च भूतले 

नागादिलक्ष्मीः पाताले गृहेषु गृहदेवता 

सर्वशस्यस्वरूपा त्वं सर्वैश्वर्यविधायिनी 

रागाधिष्ठातृदेवी त्वं ब्रह्मणश्च सरस्वती 

प्राणानामधिदेवी त्वं कृष्णस्य परमात्मनः 

गोलोके च स्वयं राधा श्रीकृष्णस्यैव वक्षसि 

गोलोकाधिष्ठिता देवी वृन्दावनवने वने 

श्रीरासमण्डले रम्या वृन्दावनविनोदिनी 

शतशृङ्गाधिदेवी त्वं नाम्ना चित्रावलीति च 

दक्षकन्या कुत्र कल्पे कुत्र कल्पे च शैलजा 

देवमातादितिस्त्वं च सर्वाधारा वसुन्धरा 

त्वमेव गङ्गा तुलसी त्वं च स्वाहा स्वधा सती 

त्वदंशांशांशकलया सर्वदेवादियोषितः 

स्त्रीरूपं चापिपुरुषं देवि त्वं च नपुंसकम् 

वृक्षाणां वृक्षरूपा त्वं सृष्टा चाङ्कररूपिणी 

वह्नौ च दाहिकाशक्तिर्जले शैत्यस्वरूपिणी 

सूर्ये तेज: स्वरूपा च प्रभारूपा च संततम् 

गन्धरूपा च भूमौ च आकाशे शब्दरूपिणी 

शोभास्वरूपा चन्द्रे च पद्मसङ्गे च निश्चितम् 

सृष्टौ सृष्टिस्वरूपा च पालने परिपालिका 

महामारी च संहारे जले च जलरूपिणी 

क्षुत्त्वं दया तवं निद्रा त्वं तृष्णा त्वं बुद्धिरूपिणी 

तुष्टिस्त्वं चापि पुष्टिस्त्वं श्रद्धा त्वं च क्षमा स्वयम् 

शान्तिस्त्वं च स्वयं भ्रान्तिः कान्तिस्त्वं कीर्तिरेवच 

लज्जा त्वं च तथा माया भुक्ति मुक्तिस्वरूपिणी 

सर्वशक्तिस्वरूपा त्वं सर्वसम्पत्प्रदायिनी 

वेदेऽनिर्वचनीया त्वं त्वां न जानाति कश्चन 

सहस्रवक्त्रस्त्वां स्तोतुं न च शक्तः सुरेश्वरि 

वेदा न शक्ताः को विद्वान न च शक्ता सरस्वती 

स्वयं विधाता शक्तो न न च विष्णु सनातनः 

किं स्तौमि पञ्चवक्त्रेण रणत्रस्तो महेश्वरि 

 कृपां कुरु महामाये मम शत्रुक्षयं कुरु


जय माता दी

*Sunny Nath Sharma*

 *आशा करता हूं,आपको मेरे द्वारा दी हुई जानकारी अच्छी लगी होगी।
आप मेरी यूट्यूब चैनल ,“SUNNY NATH” को भी सब्सक्राइब करें,वहां पर आप लाइव चैट में जुड़ कर मेरे से फ्री में बातचीत कर सकते है।
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आदेश आदेश

SUNNY NATH SHARMA*

श्री बृहस्पति जी की आरती

आदेश आदेश

Sunny Nath Sharma

श्री बृहस्पति जी की आरती

श्री बृहस्पतिवार की आरती, ॐ जय बृहस्पति देवा
ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा
ॐ जय बृहस्पति देवा

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी
ॐ जय बृहस्पति देवा

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता
ॐ जय बृहस्पति देवा

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े
ॐ जय बृहस्पति देवा

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी
ॐ जय बृहस्पति देवा

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी
ॐ जय बृहस्पति देवा

श्री बृहस्पतिवार की आरती, ॐ जय बृहस्पति देवा
ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा
ॐ जय बृहस्पति देवा

आदेश आदेश

Sunny Nath Sharma