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कृष्णा जी की चालीसा KRISHAN JI KI CHALISA KA JAAP

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Sunny Nath Sharma

कृष्णा जी की चालीसा 


बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम
अरुणअधरजनु बिम्बफल, नयनकमलअभिराम
पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज

जय यदुनंदन जय जगवंदन
जय वसुदेव देवकी नंदन
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे

जय नट-नागर, नाग नथइया
कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो
आओ दीनन कष्ट निवारो

वंशी मधुर अधर धरि टेरौ
होवे पूर्ण विनय यह मेरौ
आओ हरि पुनि माखन चाखो
आज लाज भारत की राखो

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे
मृदु मुस्कान मोहिनी डारे
राजित राजिव नयन विशाला
मोर मुकुट वैजन्तीमाला

कुंडल श्रवण, पीत पट आछे
कटि किंकिणी काछनी काछे
नील जलज सुन्दर तनु सोहे
छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे

मस्तक तिलक, अलक घुंघराले
आओ कृष्ण बांसुरी वाले
करि पय पान, पूतनहि तार्‌यो
अका बका कागासुर मार्‌यो

मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला
भै शीतल लखतहिं नंदलाला
सुरपति जब ब्रज चढ़्‌यो रिसाई
मूसर धार वारि वर्षाई

लगत लगत व्रज चहन बहायो
गोवर्धन नख धारि बचायो
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई
मुख मंह चौदह भुवन दिखाई

दुष्ट कंस अति उधम मचायो
कोटि कमल जब फूल मंगायो
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें
चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें

करि गोपिन संग रास विलासा
सबकी पूरण करी अभिलाषा
केतिक महा असुर संहार्‌यो
कंसहि केस पकड़ि दै मार्‌यो

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई
उग्रसेन कहं राज दिलाई
महि से मृतक छहों सुत लायो
मातु देवकी शोक मिटायो

भौमासुर मुर दैत्य संहारी
लाये षट दश सहसकुमारी
दै भीमहिं तृण चीर सहारा
जरासिंधु राक्षस कहं मारा

असुर बकासुर आदिक मार्‌यो
भक्तन के तब कष्ट निवार्‌यो
दीन सुदामा के दुख टार्‌यो
तंदुल तीन मूंठ मुख डार्‌यो

प्रेम के साग विदुर घर मांगे
दुर्योधन के मेवा त्यागे
लखी प्रेम की महिमा भारी
ऐसे श्याम दीन हितकारी

भारत के पारथ रथ हांके
लिये चक्र कर नहिं बल थाके
निज गीता के ज्ञान सुनाए
भक्तन हृदय सुधा वर्षाए

मीरा थी ऐसी मतवाली
विष पी गई बजाकर ताली
राना भेजा सांप पिटारी
शालीग्राम बने बनवारी

निज माया तुम विधिहिं दिखायो
उर ते संशय सकल मिटायो
तब शत निन्दा करि तत्काला
जीवन मुक्त भयो शिशुपाला

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई
दीनानाथ लाज अब जाई
तुरतहि वसन बने नंदलाला
बढ़े चीर भै अरि मुंह काला

अस अनाथ के नाथ कन्हइया
डूबत भंवर बचावइ नइया
'सुन्दरदास' आस उर धारी
दया दृष्टि कीजै बनवारी

नाथ सकल मम कुमति निवारो
क्षमहु बेगि अपराध हमारो
खोलो पट अब दर्शन दीजै
बोलो कृष्ण कन्हइया की जै
 
यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि

Sunny Nath Sharma

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आरती कृष्णा जी की KARISHAN JI KI AARTI

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Sunny Nath Sharma

आरती कृष्णा जी की

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।
आरती कुंजबिहारी की, 
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।
आरती कुंजबिहारी की.....

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दर्शन को तरसैं 
गगन सों सुमन रासि बरसै 
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।
आरती कुंजबिहारी की.....

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा 
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
आरती कुंजबिहारी की....
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू 
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।
आरती कुंजबिहारी की....
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

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Sunny Nath Sharma

घर में कलेश रहता है तो जपे कृष्ण जी का मंत्र 108 बार SHREE KRISHAN JI KA SIDDH SHABAR MANTRA

क्लेशनाशक मंत्र 

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम

मंत्र प्रभाव 
आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ मैं सनी शर्मा एक बार आप सभी के लिए क्लेश नाशक मंत्र का प्रयोग लेकर आया हूं यह मंत्र कृष्ण जी महाराज का मंत्र है इस मंत्र का नित्य जप करने से कलह और क्लेशों का अंत होकर परिवार में खुशियां वापस लौट आती हैं जो लोग कला क्लेश से पीड़ित रहते हैं वह लोग इस मंत्र का नित्य 108 अथवा उससे अधिक जप कर सकते हैं लेकिन इस मंत्र का उच्चारण करने से पहले आपको सभी नियमों की पालना करनी पड़ती है इस मंत्र का जप आप संकल्प लेकर भी कर सकते हैं लेकिन इस मंत्र का कोई नैतिक इफेक्ट आपके ऊपर नहीं आएगा इस मंत्र को पढ़ने के लिए गुरु इजाजत की जरूरत नहीं है यह मंत्र आप रूटीन लाइफ में जो व्यक्ति लंबे समय से पूजा भक्ति कर रहा है वह इस मंत्र का उच्चारण पूर्ण रूप से कर सकता है बाकी ज्यादा जानकारी के लिए मेरे यूट्यूब चैनल सनी नाथ पर विजिट करें चैनल को सब्सक्राइब और बैल आइकन पर क्लिक करें और जब भी मैं तो आपको नोटिफिकेशन मिले आप मेरे साथ लाइव चैट में अपने प्रश्नों का उत्तर पूछ सकते हो बाकी की जानकारी मेरे वेबसाइट के ऊपर है यूट्यूब पर है जय गुरु गोरख नाथ शर्मा ।




कृष्ण की लीला KRISHAN JI KI LILA



एक औरत रोटी बनाते बनाते "ॐ भगवते वासूदेवाय नम: "का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर झांकी तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था,  खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था। दौड़ कर  नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। 

अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर भगवान को जी भर कर कोसती रही बड़बड़ाती रही, हे कन्हैया क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा, जो मेरे ही बच्चे को  खैर डॉक्टर  मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया। चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई।

रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभुसत्ता को चुनौती दे रही थी।उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो? उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती।फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था।

उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी तभी टीवी पर ध्यान गया तो प्रवचन आ रहा था *प्रभु कहते हैं, मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।उस औरत ने घर के मंदिर में झांक कर देखा, कन्हैया मुस्कुरा रहे थे।

🙏🏻🙏🏻जय श्री कृष्णा... राधे राधे 🙏🏻🙏🏻



श्रीकृष्ण के वो 3 रहस्य जिनसे अनजान हैं कई लोग

श्रीकृष्ण के वो 3 रहस्य जिनसे अनजान हैं कई लोग

श्री कृष्ण वो अवतार हैं जिन्होंने गीता का ज्ञान देकर मनुष्य को जीवन जीने का रास्ता दिखाया। श्रीकृष्ण अपने न्याय के अलावा अपनी मोहक छवि के लिए भी जाने जाते हैं। भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के अवतार में सभी का मन मोहा। बचपन में गोपियों से लेकर ग्वालों तक सब कृष्ण के दीवाने थे लेकिन क्या आप जानते हैं श्रीकृष्ण के इसी मोहक रूप से जुड़े ऐसे 3 रहस्य हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं। अगर आप भी श्रीकृष्ण के भक्त हैं तो ये 3 बातें जानना आपके लिए रोचक होगा।

श्रीकृष्ण की सुगंध कैसी थी?

ऐसा वर्णन मिलता है कि श्रीकृष्ण की गंध बेहद अलग और मोहक थी। उनकी देह गंध इतनी विशेष थी कि रूप बदलने के बाद भी उन्हें पहचान लिया जाता था। कई ग्रंथों में ऐसा वर्णन मिलता है कि श्रीकृष्ण के देह से चंदन और रातरानी के फूलों जैसी सुगंध आती थी। कुछ लोग इसे अष्टगंध भी कहते थे।

श्रीकृष्ण के शरीर का रहस्य

श्रीकृष्ण ने अपने इस अवतार में कई चमत्कार दिखाए हैं। फिर वो चाहें वक्त से पहले सूर्यास्त कराना हो या फिर समय रोक देना लेकिन एक ऐसा चमत्कार था जो उन्होंने अपनी विद्या के जरिए प्राप्त किया था, यह चमत्का था उनके शरीर का बदल जाना। कभी उनका शरीर स्त्रियों की भांति कोमल हो जाता तो कभी इतना कठोर कि मानो कोई विशाल पहाड़ हो। युद्ध के समय उनका शरीर वज्र की तरह कठोर हो जाता था। योग और कलारिपट्टू विद्या में पारंगत होने के कारण वो ऐसा कर पाते थे।


 उनका चिरयुवा होना

श्रीकृष्ण थे तो भगवान लेकिन उन्होंने एक मनुष्य के रूप में जन्म लिया था जिस कारण उन्हें देह तो त्यागना पड़ा लेकिन उनकी मृत्यु के वक्त वह युवा ही थे। 119 वर्ष की उम्र में श्रीकृष्ण के देहत्याग के समय उनके शरीर का कोई बाल सफेद नहीं हुआ था और ना ही उनके शरीर के किसी हिस्से पर झुर्रियां या वृद्धावस्था के कोई लक्षण थे।

श्री कृष्ण जन्म कथा JANAM KATHA OF KRISHNA JI

श्री कृष्ण जन्म कथा

पौराणिक कथा के अनुसार भादृ महिने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था श्री कृष्ण के मामा कंस ने अपने पिता से राजगदी हथ्याकर उनको कारग्रह में बंद कर दिया और कंस मथुरा का राजा बन बैठा कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्रेम करता था देवकी का विवाह वासुदेव से हुया देवकी की विवाह के समय आकाशवानी हुई की देवकी और वासुदेव की संतान उसकी मौत का कारन होगी आकाशवाणी को सुनकर कंस बहुत भयभीत हो गया और अपनी बहन देवकी के साथ उसके पति वासुदेव दोंनो को कारगृह में बंद कर दिया। कंस ने अपनी मृत्यु के डर से देवकी और वासुदेव की सात संतानो को मार दिया फिर जब देवकी आठवी संतान को जन्म देने वाली थी दिन बहुत तेज आकाशीय बिजली कड़क रही थी ।फिर रात के 12:00 बजे ही जिस कारागार में देवकी और वासुदेव बंद थे उसके ताले अपने आप ही टूट गए।और सभी पहरेदार भी गहराई में सो गए मान ा जाता है की तबी भगवान विष्णु ने स्वय वाहा प्रगट होकर देवकी और वासुदेव से कहा की वह देवकी के कोख से जन्म लेंगे इसके साथ ही भगवान विष्णु ने वासुदेव से कहा की वह देवकी की आठवीं संतान को गोकुल के नंद बाबा के पास छोड़ आए और नंद के यहां अभी जिस कन्या का जन्म हुआ है मथुरा ले कर कंस को सांप दे वासुदेव ने भगवान विष्णु के कहे अनुसार वेसै ही किया और नंद बाबा के यहां बालकृष्ण को छोड आए इसके वाद बाल गोपाल श्री कृष्ण जी के प्रवरिश नंद बाबा और मैया यशोदा ने की बाद में श्री कृष्ण जी द्वारा ही अहंकारी कंस का वध किया गया !







श्री भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि की मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था

श्री भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि की मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था इसिलिए जन्माष्टमी के मध्य रात्रि के समय की जाने वाली पूजा का सबसे अधिक महत्वपूर्ण है जो की रात के 12:00 बजे कर 3 मिनट से 12:47 बजे तक रहेगा जाने की कुल 44 मिनट का समय है जो की श्री कृष्ण के भक्तों के लिए सबसे खास है इस समय लड्डू गोपाल और छोटे कान्हा जी का सोलह सिंगार करके उनकी विधिवत पूजा करे 18 अगस्त को रात में 9:00 मिनट से अष्टमी तिथि लगेगी और 19 अगस्त को सुबह से ही अष्टमी तिथि रहेगी ओर 19 अगस्त को रात को 10 बजे से 59 मिनट पर अष्टमी खतम हो जाएगी। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते हुए भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की अराधना करें मूर्ति स्थापना के बाद उनका गौ के दूध और गंगा जल से अभिषेक करें उन्हें मनमोहक बस्तर पहनाए ,मोर मुकुट ,बंसुरी,चंदन ,बैजंती माला ,तुलसी दल से उन सुसजित करें फूल, फल ,माखन, मिश्री, मिठाई ,धूप,दीप, गंध आदी भी अर्पित करे  फिर बाल श्री कृष्ण जी की आरती उतारे पुरी रात जागरन करे, अगले दिन अन जल गृहन करें