आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ मैं सनी शर्मा एक बार फिर से आप सभी के लिए भैरव नाथ जी का रक्षा सिद्ध शाबर मंत्र प्रयोग लेकर आए हो इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद आप अपनी रक्षा अपने परिवार की रक्षा अथवा किसी व्यक्ति के ऊपर किसी प्रकार की ऊपरी वादा हो उसका इलाज कर सकते हो याद रखना गुरु सानिध्य में चलते हुए गुरु आज्ञा से अथवा अगर आप इन सभी चीजों के ज्ञाता हो तो ही आपने इन मंत्रों का प्रयोग करना है बिना गुरु के किसी मंत्र में सिद्धि नहीं मिलती है जन कल्याण हेतु यहां पर मंत्र प्रकाशित किए जाते हैं ज्यादा जानकारी के लिए मेरे यूट्यूब चैनल सनी नाथ पर विजिट करें चैनल को सब्सक्राइब बैल आइकन पर क्लिक करें लाइव चैट में मेरे साथ फ्री में बात कर सकते हो बाकी की सारी सर्विस पेड़ है साधना और काम के अनुसार ही भोग प्रसाद लिया जाता है कोई साधना मेरे सानिध्य में करनी है साधना के अनुसार ही आपको साधना के विषय में जो जो सामग्री और जो हवन निकलते हैं वह आपको बताए जाते हैं और खुद स्वयं करे जाते हैं बाकी की जानकारी मेरी वेबसाइट को अच्छे से पढ़ कर प्राप्त कर ले उसको यूट्यूब के डिस्क्रिप्शन बॉक्स को अच्छे से देख ले और समझ ले इस मंत्र का प्रयोग आपने 41 दिन करना है नित्य सुबह शाम तीन तीन माला का जप करना है रुद्राक्ष की माला काले वस्त्र काला ही कंबल का आसन
लेना है यह साधना रात्रि 10:00 बजे शुरू करनी है और 12:00 के बीच बीच आप को संपन्न करनी है मंत्र जप करने के बाद आपने वही सोना है इसे साधना का अनुष्ठान घर के किसी वैरान कोने में विरान कमरे में कर सकते हो अथवा आपके पास कोई खाली जगह खाली स्थान हो वहां पर भी साधना को कर सकते हैं यह साधना आप मेरे सानिध्य में भी कर सकते हो साधना का भोग प्रसाद जाने के लिए फिर व्हाट्सएप पर मैसेज छोड़ सकते हो बाकी की विधि आपको वहां पर बता दी जाएगी आदेश आदेश जय गुरु गोरखनाथ सनी नाथ शर्मा ।
ॐ गुरुजी काली पुत्र काल पिण्ड प्राण की आठों प्रहर रक्षा करें जो इस हँसा ऊपर अस्त्र शस्त्र चलायें पलट काल भैरव उसी को खायें काल भैरव जल बाँधे थल बाँधे आर्या आसमान बाँधेजादू टोना बाँधे मढ़ी मसाण बाँधेकब्र कब्रिस्तान बाँधे दुष्ट मुष्ट को बाँधे बाँध बाँध जल्दी बाँध रोम रोम में बाँध बाल बाल में बाँध चाम चाम में बाँध हाड़ हाड़ में बाँध नख सिर में बाँध कपाल चोटी में बाँध घट पिण्ड में बाँधनवनाड़ी बहत्तर कोठा में बाँध बाँध बाँध कर मढ़ी मसाण में ले जावें मढ़ी मसाण में ले जाकर ठिकरें के खप्पर में जलावें \श्रीनाथजी गुरुजी को आदेश!
No comments:
Post a Comment