क्यों वर्जित है तम्बाकू और सिगरेट और मद्य मांस का भक्षण
मांस शराब तम्बाकू और सिगरेट क्यों नहीं इस्तेमाल करने चाहिए...
मांस खाने से जीव हत्या का पाप लगता है। सनातन धर्म में जीव हत्या अक्षम्य अपराध है पर अगर कोई जीव परेशान करे और समाज में अधर्म और अव्यवस्था ला का समाज में धर्म के साथ हस्तक्षेप कर सनातन विधा को बदले, उसके लिए शास्त्रीय दंड बताए गए हैं।मांस खाने से जीव हत्या होगी ही। किसी भी निर्दोष की हत्या करने से उसका पाप का भागी उसको काटने वाला, उसके खाने वाला और परोसने वाला भी
बनेगा। मांस का मतलब होता है मेरा ही अंश, तो इस हिसाब से शास्त्रीय धर्म का कहना है की जो व्यक्ति इस जन्म में मांस भक्षण करेगा उसको अगले जन्म में वही जानवर बन कर आना होगा और जिस का मांस इस जन्म में उसने मज़े से खाया है वही जीव उसको उस ही प्रकार खायेगा।
शराब पीने के लिए भी माना किया जाता है। पहला कारण तो यही है की इस से संसार में अव्यवस्था और अशांति फैलती है। सब जानते हैं की शराब पीने वाले लोग घरों में ताल मेल और मधुर व्यवहार नहीं बना सकते। मद्य पान से अनंतो जीवों को मारने का पाप चढ़ने वाला कहा गया है। ऐसा इस लिए क्योंकि शराब जब बनती है तो उसके बहुत ही सूक्ष्म जीवाणु पनपते हैं जो खाद्य वस्तु को शराब में परिवर्तित करते हैं। जब ये कीट शराब बनाने की प्रक्रिया में जलते हैं तब उनका मृत्यु का कारण शराब पीने वाला और बनाने वाला दोनो होते हैं। इस लिए शराब भी नहीं पीनी चाहिए।शास्त्र में अपराध बन जाने पर उनका प्रायश्चित भी बताया गया है परंतु मद्यपान का कोई भी पश्च्यताप नही है।
तम्बाकू की उत्पति गौ माता के रक्त कतरो से हुई है और सर्वथा अशुद्ध स्थान पर तम्बाकू का उत्पादन होता है इस लिए तम्बाकू तो सर्वथा ग्राह्य नही है। इसके सेवन से बीमारी तो होगी ही पर गौ मांस भक्षण का पाप भी लगेगा।इस ही प्रकार कभी भी नमक को सीधा नही खाना चाहिए। जब भी नमक खाना हो तो किसी चीज में मिला कर ही खाएं। सीधा सिर्फ नमक खाने से भी गौ मांस भक्षण का पाप लगता है।
इस ही प्रकार यदि कभी देसी वेद लक्षणों से युक्त भारतीय देसी गौ माता का गौ घृत उपलब्ध हो, या कोई भी घृत हो, उसको जूठे खाने में, या जूठे खाने की थाली में नहीं लेना चाहिए। सबसे शुद्ध वस्तुओं में से एक देसी गौ घृत देवताओं के लिए भी दुर्लभ है और इसका इस प्रकार का अपमान अक्षम्य है।

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